हिन्दी है हम…… हिन्दी दिवस पर विशेष

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NTC NEWS MEDIA/ हिंदी दिवस

सालों भर अंग्रेजी में ऑफिशियल वर्क करने के बाद साल का एक दिन हम हिंदी दिवस के रूप में मना कर इतिश्री कर लेते हैं । बड़े बड़े बैनर, बड़े-बड़े पोस्टर लगाए जाते हैं कि हमें सारा कार्य हिंदी में करना है सब कुछ हिंदी में बोलना है, हिंदी हमारी मातृ जुबान है , इसकी कदर करनी है लेकिन वहीं लोग घरों में अपने बच्चों को डांटते हैं कि अंग्रेजी पर ज्यादा ध्यान दो, अंग्रेजी में बातचीत करो यहां तक की अंग्रेजी मीडियम में अपने बच्चों को एडमिशन करा कर गर्व का अनुभव करते हैं। इतना से भी दिल नहीं भरता है तो बच्चों को अंग्रेजी का टूशन भेजते हैं उससे भी दिल नहीं भरता है तो बच्चों को अंग्रेजी बोलने के लिए स्पोकन का कोर्स कराते हैं रात दिन होने टॉर्चर करते हैं कि अंग्रेजी में बोलो अंग्रेजी में पढ़ो……… अंग्रेजी भाषा अंग्रेजी संस्कृति आदि का इतना प्रचार करते हुए भी अगर भारत के हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोग 1 दिन का हिंदी दिवस मना कर इसका इतिश्री कर ले तो इसे कम न समझिए।

                           मातृभाषा का देश के विकास पर काफी प्रभाव पड़ता है हम चाइना के विकास की बात करें, रशिया के विकास की बात करें,अमेरिका के विकास की बात करें, जापान की विकास की बात करें अथवा उन सभी देशों के विकास की बात करें जिन्होंने अपने यहां, अपनी मूल बोलचाल की भाषा को ही शैक्षणिक भाषा के रूप में स्वीकार किया है वे सभी देश आज विकसित देशों की कतार में सीना तान के खड़े हैं।

              यह विचारणीय प्रश्न है कि जो हिंदी हमारे राष्ट्र की दर्जा प्राप्त राष्ट्रीय भाषा के रूप में वर्षों से है।  उसके लिए एक दिन हिंदी दिवस मनाना क्या किसी अपमान से कम नहीं है…?

                हिंदी भाषाएं विकासवाद अथवा बोलचाल के विकासवाद में भले ही आगे बढ़ी है किंतु स्कूली शिक्षा के विकासवाद में हिंदी लिपि लेखनी आदि के विकासवाद में या कुछ पिछड़ी से नजर आती है कारण अंग्रेजी का ग्लोबल भाषा के रूप में स्थापित होना है ।

                     दूसरी सबसे बड़ी बात यह है कि अंग्रेजी अथवा ब्रिटेन की भाषा का पूरी दुनिया पर गहरा प्रभाव इसलिए दिखता है क्योंकि ब्रिटेन ने पूरी दुनिया पर अपना हुकूमत स्थापित किया एवं वहां की भाषा संस्कृति में सेंध लगाकर अपना आर्थिक उल्लू सीधा किया या यूं कहें की अपने उपनिवेशों के आर्थिक संसाधनों को लूटने की ऐसी पराकाष्ठा पर ब्रिटेन पहुंच गया जहां उसे अपने उपनिवेशों के रखरखाव के लिए जो कामगार चाहिए थे उनको उसने अपनी भाषा में प्रशिक्षित किया यही कारण है कि अंग्रेजी ग्लोबल भाषा के रूप में बहुत जल्द ही दुनिया में फैल गई।

इन सबके बावजूद हमारे देश में हिंदी भाषी राज्यों की आबादी कुल 46 घर के आस-पास में है 2011 की जनगणना के अनुसार देश के करीब 1.2 अरब आबादी में 41.0 3 फीसदी लोग हिंदी बोलने व समझने वाले हैं

वही जब हम दुनिया की बात करें तो पूरी दुनिया में 80 करोड़ लोग हिंदी बोलने वह समझने वाले हैं लोग हैं और आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि सिर्फ भारत-पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया के 25 से अधिक देशों में हिंदी बोली जाती है ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रत्येक भाषण में जिस तरह से हिंदी का प्रयोग किया है चाहे वह भारत के और भी हिंदी भाषी क्षेत्र हो अथवा विश्व के अन्य देश क्यों ना हो उन्होंने हर मंच पर हिंदी में भाषण देकर संयुक्त राष्ट्र संघ में भी हिंदी में भाषण देकर के हिंदी का व्यापक प्रचार प्रसार किया है एवं इसे लोकप्रिय भाषा के रूप में प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई भी अपने हर मंच से हिंदी में ही भाषण देते थे और सर्वप्रथम संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने का गौरव माननीय स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी को प्राप्त है चाहे वे सदन में किसी मुद्दे पर अपनी बात रखते हो अथवा किसी राजनीतिक अथवा गैर राजनीतिक मंच से बोलते हो अपनी कविताओं के माध्यम से जनमानस को एक संदेश देते हैं सब में भाषा का प्रभाव हिंदी ही रहा है ।

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