वन महोत्सव के अवसर पर पौधारोपण एबं जागरूकता अभियान के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण विषय पर एक सेमिनार का आयोजन

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बिहार सरकार, बी.आर.ए.बी.यू, मुजफ्फरपुर, एनएसएस रेजीओनल डायरेक्टर पटना एबं एनएसएस को-ऑर्डिनेटर, बी.आर.ए.बी.यू, मुजफ्फरपुर के आदेशानुसार वन महोत्सव 2019 के तहत लक्ष्मी नारायण दुबे महाविद्यालय, मोतिहारी के एनएसएस इकाई के द्वारा एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी प्रोफेसर दुर्गेश मणि तिवारी के नेतृत्व में आज एल.एन.डी कॉलेज कैंपस में पौधारोपण एबं जागरूकता अभियान के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के संस्थापक स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण दुबे का मूर्ति को माल्यापर्ण के माध्यम से किया गया। माल्यापर्ण कार्यक्रम के पश्चात अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया।
प्रोफेसर दुर्गेश मणि तिवारी ने मंच संचालन करते हुए अपना स्वागत भाषण में समाज के सभि बर्गो के लोगो को एबं कॉलेज प्रशासन को अभिबादन ब्यक्त करते हुए उनका सहयोग के लिए अपना आभार ब्यक्त किये।
सेमिनार का उद्घाटन मुख्य अतिथि एलएनडी कॉलेज के प्रचार्य प्रोफेसर (डॉ.) अरुण कुमार, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर द्वारिका प्रसाद सिंह, पीजी डीपार्टमेंट ऑफ पोलिटिकल साइंस, बिहार यूनिवर्सिटी, डॉ. राजेश कुमार सिंहा, हेड, डिपार्टमेंट ऑफ फिलोसोफी, डॉ. परमानंद त्रिपाठी, हेड, डिपार्टमेंट ऑफ एडुकेशन एवं एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. दुर्गेश मणि तिवारी के द्वारा दीप प्रज्वलित कर आरंभ की गई।
इसके बाद सेमिनार का मुख्य अतिथि कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) अरुण कुमार ने सभीको संबोधित करते हुऐ पर्यावरण संरक्षण के बिषय में अपना बक्तयब लोगो को बीच रखे। उन्होंने बताया कि पृथ्वी का बदलता वातावरण बहुत ही गंभीर विषय है इसका मुख्य कारण अंधाधुन पेड़ों की कटाई और सिकुड़ते वन क्षेत्र के कारण पृथ्वी का वातावरण गर्म हो रहा है.
पेड़ों की कटाई के कारण आपने देखा होगा कि तापमान घटता बढ़ता है, बाढ़, आंधी तूफान सूखा और भूमि क्षरण जैसी कई समस्याएं उत्पन्न हो चुकी है. अगर जल्द ही हम इस विषय पर कुछ नहीं करते हैं तो अपने ही हाथों अपने घर (पृथ्वी) को नष्ट कर देंगे। मानव विकास करने की राह में इतना लालची हो गया है कि उसको जीवन देने वाले वनों और पेड़ पौधों की वह अंधाधुंध कटाई करने में लगा हुआ है और अपना जीवन भोग-विलास में बिता रहा है. यह बहुत ही चिंता का विषय है कि कोई कैसे अपने जीवन देने वाले जीवनदाता को ही मार काट रहा है. मानव प्रकृति की रक्षा नहीं कर रहा है इसलिए कभी-कभी प्रकृति भी अपना विकराल रूप दिखाती है और उसमें हजारों लोगों की मृत्यु हो जाती है। यह प्रकृति का मानव को चेतावनी है कि अगर वह जल्द ही नहीं चेता तो पृथ्वी का नष्ट होना तय है।सेमिनार में आये हुए विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर द्वारिका प्रसाद सिंह, पीजी डिपार्टमेंट ऑफ पोलिटिकल साइंस, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर ने पर्यावरण संरक्षण बिसय पर बोले पर्यावरण के प्रति पुरातन काल में भी लोग बहुत सचेत थे जैसे कि गुप्तवंश, मौर्यवंश, मुगलवंश वनों को सुरक्षित रखने के लिए बहुत ही सराहनीय प्रयास किए गए थे। लेकिन जैसे-जैसे हमारा देश तरक्की करता जा रहा है अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वह निरंतर वनों की कटाई करता जा रहा है. इस बात को सन 1947 में ही भाप लिया गया था कि अगर वनों को नहीं बचाया गया तो मानव सभ्यता का जीवन संकट में पड़ सकता है।
सन् 1947 में स्व. जवाहरलाल नेहरू, स्व. डॉ. राजेंद्र प्रसाद और मौलाना अब्दुल कलाम आजाद के के संयुक्त प्रयास से जुलाई के प्रथम सप्ताह में वन महोत्सव मनाया जाता है. यह वन महोत्सव इसलिए मनाया जाता है जिससे लोगों में पेड़ लगाने के प्रति चेतना उत्पन्न हो और अधिक से अधिक वे पेड़ लगाएं।
एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी प्रोफेसर दुर्गेश मणि तिवारी ने सेमिनार में बताया कि भारत में निरंतर वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण हमारे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। और जितने पेड़ों की कटाई की जा रही थी उसमें से आधे भी नहीं लगाई जा रहे थे. जिसके कारण वनों को बचाने के लिए सरकार द्वारा जुलाई माह में वन महोत्सव का आयोजन किया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग पेड़ लगाएं और एक दूसरे को इस बारे में सचेत करें कि पेड़ लगाना हमारे जीवन के लिए कितना आवश्यक हैं।
डॉ. राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि इस महोत्सव के दौरान सरकार द्वारा भी लाखों पेड़ लगाए जाते हैं और साथ ही कई ऐसी संस्थाएं भी होती हैं जो कि जगह जगह पर पौधारोपण करती है। वन महोत्सव का प्रमुख उद्देश्य यही है कि लोग पेड़ों का महत्व समय रहते ही समझ जाएं और अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण करे।
डाॅ.परमानंद त्रिपाठी ने बताया कि 1947 में वन महोत्सव का आयोजन सिर्फ अनौपचारिक रूप से ही किया गया था जिसके कारण यह है बड़ा रूप नहीं ले पाया लेकिन सन 1950 में तत्कालीन कृषि मंत्री कन्हैया लाल माणिकलाल मुंशी ने इस महोत्सव को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया। यह निर्णय मील का पत्थर साबित हुआ क्योंकि अगर यह निर्णय नहीं लिया जाता तो शायद आज भारत में 20% की जगह 10% ही वन पाए जाते.
वहीं सेमिनार खत्म होने के बाद एनएसएस वॉलिंटियर्स के द्वारा कॉलेज परिसर एवं उसके आसपास इलाकों में पौधारोपण किया गया एवं एनएसएस वॉलिंटियर्स ने शपथ भी दिया कि आज से हम पर्यावरण के प्रति सचेत रहेंगे और अधिक से अधिक पेड़ पौधा लगाएंगे और उसे बचाएंगे और लोगों को जागरूक करेंगे।
प्रोफेसर दुर्गेश मणि तिवारी ने बताया कि सेमीनार में भाग लेने वाले सभी पार्टिसिपेंट्स को एनएसएस के ओर से सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील किये इस वन महोत्सव को दौरान समाज के सभी वर्ग के लोग अपने अपने घर, ऑफिस, संस्थान, कार्यस्थल पर पौधारोपण कर समाज एबं पर्यावरण के प्रति अपना दायित्व निभाए। वन महोत्सव दिनांक 1 से 15 अगस्त तक पूरे बिहार में मनाया जाएगा जिसके तहत 1.5 क्रोड़ पौधा पूरे बिहार भर में लगाया जाएगा।
कार्यक्रम का समापन पे धन्यबाद ज्ञापन प्रोफेसर मनोज कुमार के द्वारा किया गया। आज के कार्यक्रम में मोजूत थे प्रोफ. प्रमोद कुमार रॉय, हेड अस्सिस्टेंट श्री राजीव कुमार, एनएसएस वालंटियर रवी कांत पांडे, अभिसारिका कुमारी, अपूर्वा राज अंशु कुमारी, विकास कुमार, अमन कुमार, नरेश, अप्पू, कुमार नवनीत कुमार जैसमिन श्रीवास्तव, रूपम कुमारी आदि।

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