पकड़ीदयाल के सुरेश ने BPSC में 275 रैंक लाकर किया क्षेत्र का नाम रौशन, पहले पत्रकार बनना चाहते थे अब बनेंगे ऑफिसर

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पूर्वी चंपारण/ नकुल कुमार/?+91 8083686563

पू.च.। पकड़ीदयाल प्रखंड के सिरहा पंचायत, कटास टोला निवासी सुरेश कुमार ने 63वी बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) में 275 वा रैंक लाकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

?पारिवारिक पृष्ठभूमि:-
पेशे से किसान बिगन साहनी के तीन संतानो में सुरेश बड़े हैं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा पकड़ीदयाल स्थित बड़कागांव हाई स्कूल से हुई। बनारस के उदय प्रताप इंटर महाविद्यालय से इंटर करने के पश्चात इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी, मोतीलाल नेहरू कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया।

? जर्नलिस्ट बनने का सपना टूटा:-
सुरेश कुमार ने बताया कि वह शुरू शुरू में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जर्नलिस्ट बनना चाहते थे इसके लिए उन्होंने कोशिश भी की एवं जामिया मिलिया इस्लामिया का एंट्रेंस भी क्वालीफाई किया था लेकिन इनके मन मुताबिक ब्रांच न मिल पाने के कारण जर्नलिस्ट बनने का ख्वाब त्याग दिया।

?कॉलेज की शिक्षा-दीक्षा एवं लक्ष्य निर्धारण:-
दिल्ली यूनिवर्सिटी के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस एडमिशन लेने के पहले से ही इनके मन में काफी उठापटक चल रहा था
आगे करना क्या है यह कुछ समझ में नहीं आ रहा था। लक्ष्य पत्रकार बनना था लेकिन वह तो हो नहीं पाया। जब इन्होंने ग्रेजुएशन में पॉलिटिकल साइंस सब्जेक्ट से एडमिशन लिया उसके बाद से कॉलेज के विभिन्न स्टूडेंट के बीच सिविल सर्विसेज की तैयारी को लेकर ग्रुप बनते गए उन्हीं ग्रुप में सुरेश कुमार शामिल हो गए एवं धीरे धीरे ग्रुप मेंबर्स, टीचर्स, सीनियर्स के पॉजिटिव मोटिवेशन से फर्स्ट ईयर में ही सुरेश कुमार को लगने लगा कि हां मैं यूपीएससी कर सकता हूं और फिर इसी के साथ ही श्री कुमार ने यूपीएससी कैक करने का लक्ष्य निर्धारित किया। ध्यान देने वाली बात यह है कि तब तक सुरेश कुमार ने बीपीएससी परीक्षा देने अथवा नहीं देने की विषय में रत्ती भर नहीं सोचा था

? तैयारी एवं परेशानी :-
जैसे सभी तैयारी करने वालों के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा मनी की होती है सुरेश कुमार के साथ हुई यही परेशानी थी। पेशे से किसान पिता जितना आर्थिक सहयोग कर सकते थे उतना तो भेज ही देते थे लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि महँगी कोचिंग फीस कहां से आएगी…? घर की माली हालत को देखते हुए सुरेश कुमार ने अपने सपनों की उड़ान को जारी रखने के लिए सेल्फ स्टडी, ग्रुप एवं टेस्ट सीरीज ज्वाइन किया।

?UPSC का इक्जाम… असफलता
2017 में यूपीएससी में पीटी और मेंस निकलने के बाद इंटरव्यू में सेलेक्ट न होना, इनके लिए किसी सदमे से कम नहीं था एक तरफ परिवार की माली हालत खराब होती जा रही थी दूसरी ओर इनपर कहीं ना कहीं सेट होने का दबाव था और इसी दबाव में सुरेश कुमार ने जॉब सिक्योरिटी के लिए पहली पहली बार बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन का फॉर्म फिल अप किया और पहले प्रयास में ही इन्होंने 275 रैंक लाकर यह साबित कर दिया कि इनमें यूपीएससी लायक क्षमता है बशर्ते परिवार व समाज की ओर से इन्हें और भी प्रयास के अवसर दिए जाए।

?नए परीक्षार्थीयों के लिए मैसेज:-
बीपीएससी परीक्षा में बैठ रहे नए परीक्षार्थियों को मैसेज देते हुए सुरेश कुमार कहते हैं कि पीटी की तैयारी में जितना नॉलेज हो उतना ही अच्छा है फेक्चुअल क्वेश्चन सोते हैं घर से काम लेना होता है इसके साथ ही साथ मेंस के लिए राइटिंग प्रैक्टिस बहुत ज्यादा जरूरी है। इसके साथ ही साथ श्री कुमार ने बताया कि इंटरव्यू के लिए इन्होंने माॅक ज्वाइन किया था जिसमें संवाद आईएएस, पतंजलि, दृष्टि, निर्माण आदि प्रमुख है।

? सफलता का श्रेय:-
श्रीकुमार अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं जिनका फाइनेंसियल ई सपोर्ट के साथ-साथ इमोशनली सपोर्ट एवं हमेशा से कुछ करने आगे बढ़ने का मोटिवेशन रहा इसके साथ ही साथ वह अपने शिक्षकों एवं दोस्तों को भी अपनी सफलता का श्रेय देते हैं।

? आगे की प्लानिंग:-
सुरेश कुमार का कहना है कि उनका मिशन आईएएस जारी रहेगा बीपीएससी देने के पीछे सिर्फ एकमात्र कारण जॉब सिक्योरिटी था क्योंकि जॉब के लिए उन पर काफी दबाव था जो कि अब खत्म हो गया है।

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