अभिषेक रंजन के दिल की कलम से

साहित्य

सत्य पे अटल रहना मेरा काम है।
कालिख की कोठरी में जाकर बेदाग वापस आ जाना मेरा काम है।
अपने चरित्र को नित्य परिष्कृत, परिमार्जित करना मेरा काम है।
अपने संकल्पों को जीना, अपने सिद्धांतों पे अडिग रहना मेरा काम है।
तूफानों में भी शांत रहकर , भीषण गर्मी में सोने जैसा तपकर, खरा होते रहना मेरा काम है।

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  1. अपने स्निग्ध मुस्कान से लोगों के दिलों में जगह बनाना मेरा काम है।
    अपने पुरुषार्थ के दम पर राष्ट्र को विश्व पटल पे आगे रखना मेरा काम है।
    भारत माता का कभी किसी भी अवस्था मे सर न झुकने देना मेरा काम है।
    अपनी सादगी और विनम्रता से हृदयों को स्पर्शित करना मेरा काम है।

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