मोतिहारी में आसाराम बापू की शिष्या ने भरी हुंकार। धर्म एवं संस्कति को समाप्त करने के लिए हो रहा है षड्यंत्र

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मोतिहारी। संत आसाराम बापू के 86वें अवतरण दिवस (Birthday) ‘विश्व सेवा-सत्संग दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में इसके पूर्व संध्या पर उनकी संस्था श्री योग वेदांत सेवा समिति मोतिहारी के तत्वधान में एक विशाल भजन-कीर्तन सह बाईक एवं सुसज्जित रथ शोभायात्रा का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में आसाराम बापू के समर्थक एवं साधक शामिल हुए।
इस दौरान शहर में एक विशाल संकीर्तन यात्रा का आयोजन हुआ जिसमें सांस्कृतिक झाँकियों के साथ-साथ संत-महापुरुषों की महिमा, देशभक्ति दर्शाते बैनर और गरीबों की सेवा के संदेश को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भाग लिया । वहीं इस आयोजन में भीड़ देख के लगा कि आसाराम बापू के जेल में होने के बावजूद उनके शिष्यों की श्रद्धा में थोड़ी भी कमी नहीं आयी है ।
संकीर्तन यात्रा की शुरुआत मोतिहारी छतौनी स्थित बौद्धीमाई मंदिर से शुरू होकर छतौनी चौक, आर्य समाज चौक, मधुबन छावनी चौक, गाँधी चौक, मोतीझील पथ, गायत्री मंदिर, नगर थाना, पेट्रोल पंप चाँदमारी गुमटी होते हुए चाँदमारी चौक स्थित आसाराम बापू आश्रम पहुँचकर सम्पन्न हुई।
इस दौरान श्री योग वेदांत सेवा समिति मोतिहारी के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी राजेश रंजन ने बताया कि आज विश्व के सामने खड़ी अनेक समस्याओं का समाधान समाज की निःस्वार्थ भाव से सेवा करने से ही सम्भव है। इसका उद्घोष एवं सफल भगीरथ प्रयास किया है- लोकसंत श्री आशारामजी बापू ने । उनका यह प्रयास आज विश्वव्यापी अभियान का रूप ले चुका है ।
उन्होंने कहा कि पूज्य बापूजी से प्रेरणा पाकर उनके करोड़ो शिष्य अपने सद्गुरुदेव के अवतरण-दिवस को ‘विश्व सेवा-सत्संग’ दिवस के रूप में पिछले अनेक वर्षों से मनाते आ रहे हैं । गत वर्षों की तरह इस अवतरण दिवस पर भी पूज्य बापूजी के शिष्यों द्वारा वर्षभर चलने वाले 27 मुख्य एवं अन्य कई सेवा अभियानों का नवीनीकरण भी होता है।
दो दिवसीय आयोजित इस कार्यक्रम के प्रथम दिन आसाराम बापू के मध्य प्रदेश स्थित छिंदवाड़ा आश्रम से आई उनकी शिष्या साध्वी रेखा बहन के सानिध्य में भजन कीर्तन एवं गीता भागवत सत्संग का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में साधक शामिल हुए।
इस दौरान साध्वी रेखा बहन ने कहा कि गुरूदेव संत श्री आशारामजी बापू का कहना है कि कर्म करने की कला जान लो और उसे कर्मयोग बनाओ तो कर्म आपको भगवान से मिलानेवाले हो जायेंगे। आप ‘बहुजनहिताय, बहुजनसुखाय’ कार्य करके स्वयं परमात्मा में विश्रांति पा लो । बाहर से सुख पाने की वासना मिटाओ और सुखस्वरूप में विश्रांति पाते जाओ ।
सुश्री ने कहा कि इन्हीं वचनों का आदर करते हुए पूज्यश्री के शिष्यों द्वारा विभिन्न समाजोत्थान के कार्य किये जाते हैं । गरीबों, अनाथों, अभावग्रस्त आदिवासियों और अस्पतालों में मरीजों को अन्न, औषधि, वस्त्र आदि जीवनोपयोगी वस्तुएँ तथा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है तथा बच्चों को सत्साहित्य, नोटबुकें आदि का वितरण, ‘निःशुल्क चिकित्सा शिविरों’ का आयोजन आदि किया जाता है ।
उन्होंने कहा कि “दिवस कार्यक्रम के निमित्त मैं जहां भी जा रही हूं वहां साधकों के अलावा अन्य स्थानीय नागरिकों का भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है आज जो बापू के साधक नहीं है वो भी मानने लगे हैं कि हमारे धर्म एवं संस्कृति को समाप्त करने के लिए षड्यंत्र किया जा रहा है।
इस दौरान उपाध्यक्ष कौशल किशोर सिंह ने कहा कि दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन आज शोभायात्रा एवं भजन कीर्तन का आयोजन किया गया है तो वहीं कल 21 अप्रैल को बापू जी के अवतरण दिवस पर दीप प्रज्ज्वलन, भजन कीर्तन सत्संग के साथ ही साथ शर्बत वितरण सेवा, गरीब-गुरबों को आवश्यक सामग्री का वितरण एवं विशाल भंडारा का आयोजन किया जाएगा।
आपको बता दें कि उनकी किताब आशा रामायण के अनुसार… आसाराम बापू का जन्म संयुक्त भारत के सिंध प्रांत में हुआ था। भारत विभाजन के बाद उनका परिवार गुजरात के अमदाबाद स्थित मणिनगर में आकर रहने लगा। यहीं पर उनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा हुई थी। उनके पिता का नाम थाउमल एवं माता का नाम महँगीबा था। उनके गुरू का नाम लीला राम था। उनकी शादी लक्ष्मी देवी से हुई। जिससे उन्हें दो संतानों नारायण साईं एवं साध्वी भारती की प्राप्ति हुई।
किताब के अनुसार अहमदाबाद में ही साबरमती के किनारे 40 दिन की कठिन तपस्या के बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। और तब से वह पूरे भारत में घूम घूम कर सत्संग भजन कीर्तन ध्यान कराते थे। एक अनुमान के अनुसार उनके चार चार करोड़ फॉलोवड हैं एवं 2013 में उनके जेल जाने के बाद भी उनकी साधकों की अटूट श्रद्धा उनके प्रति बनी हुई है। यही कारण है कि उनके साधक उनका जन्मदिन एवं आत्मसाक्षात्कार दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं।
इस कार्यक्रम के दौरान कोषाध्यक्ष रामलाल प्रसाद, दिलीप जयसवाल, अरूणाकर कुमार, संजीव चौरसिया, राजू टिकैत, राकेश सिंह, रंजीत शुक्ला, अच्छेलाल साह, अंजू बहन, सरोज बहन, अमित कुमार, मनोज कुमार, पवन कुमार, राम अयोध्या प्रसाद, शशि भूषण प्रसाद, सिकंदर भाई सहित सैकड़ों की संख्या में आसाराम बापू के समर्थक एवं साधक शामिल हुए।

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