सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन(SRA) की मांग, भारत के सभी सामाजिक समूहो की जातिवार जनगणना कराये केंद्र सरकार

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भारत में जातिगत जनगणना की मांग जोर पकड़ती जा रही है इससे मुखर आवाज बिहार से उठ रही है एवं धीरे-धीरे भारत के अन्य राज्यों के सामाजिक संगठन भी इस मुद्दे पर मुखर होते जा रहे हैं एवं सरकार से भारत के सभी सामाजिक समूह की जातिवार जनगणना कराए जाने की मांग कर रहे हैं इस संदर्भ में लखनऊ में सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन की एक बैठक की गई…


👉 पूर्व न्यायमूर्ति वीरेन्द्र कुमार यादव जी की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम
लखनऊ। लखनऊ दरुलसफ़ा कॉमन हॉल के A-Block में सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन (SRA) की बैठक की गयी। जिसमें प्रदेश तथा अन्य प्रदेशों के OBC, SC और  ST एवं अल्प संख्यक समाज के दर्जनों संगठनों ने भाग लिया।
पूर्व न्यायमूर्ति वीरेन्द्र कुमार यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में देश भर के तमाम दलित पिछड़े  संगठनों के पदाधिकारी कार्यकर्ता उपस्थित हुए।
👉 इस सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन की लखनऊ में आयोजित बैठक का एजेंडे में निम्न बिन्दु शामिल थे………..
(1) सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी की जाति गणना को न करवाने के लिए दी गई आख्या  की निंदा करता है ।
(2) सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन सन् 2021 में होने वाली राष्ट्रीय जनगणना में  भारत के  सभी सामाजिक समूह जैसे अनुसूचित जाति , अनुसूचित जन जाति. ओबीसी और सामान्य श्रेणी के  सभी धार्मिक और क्षेत्रीय समुदायो को सम्मिलित करते हुऐ जनगणना की मांग करता है ,ताकि अनुसूचित जाति , अनुसूचित जन जाति.ओबीसी और माईनारटी को कुलीनतंत्र के चंगुल से मुक्त कराया जा सके।
(3) सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन ओबीसी, अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए उनकी संख्या के समानुपात में आरक्षण की मांग करता है । किसी भी दशा मे इन समुदायों  मे  सम्मिलित जातियों की वर्तमान आरक्षण कोटे की हिस्सेदारी मे कटौती न हो।
(4) सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन उत्तर प्रदेश के सामाजिक  एवं शैक्षणिक रूप से अति पिछड़े समाजों (एमबीसीज) के आरक्षण को बढ़ाने के लिए विशेष उपायों का समर्थन करता है ताकि वे यथाशीघ्र सत्ता एवं संसाधनों में अपनी वांछित हिस्सेदारी प्राप्त कर सकें।  अति पिछडो (एमबीसी ) के लिए वर्तमान आरक्षण के अतिरिक्त उसमें वृद्धि करने के लिए खुली एवं सामान्य केटेगरी से ईडब्ल्यूएस(EWS) की तरह आरक्षण व्यवस्था की पहल भी की जायेगी। ऐसी व्यवस्था अन्य राज्यों में भी की जानी चाहिए।
(5) सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन   विभिन्न समाजों /समाजिक समुदायों की वर्तमान आरक्षण कोटे की सीमा को बिना किसी कटौती के निरंतरता बनाए रखे जाने की मांग करता है ।
(6) सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन   सभी जातियों एवं समुदायों के लिए जो आयकर अधिनियम के अंतर्गत आयकर दाता नहीं हैं , के लिए निशुल्क गुणवत्तापरक शिक्षा एवं स्वास्थ्य की  निःशुल्क देखभाल  करने की मांग करता है ।
(7) सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन  सभी जातियों /समुदायों के कमजोर लोगों के लिए जो गरीबी रेखा से नीचे आते हैं को बिना सामाजिक भेदभाव किए  उनके लिए ईडब्ल्यूएस (EWS ) आरक्षण देने की मांग करता है।
(8) केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना कराने में की जा रही आनाकानी करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सन् 2021 की सामान्य जनगणना के साथ ही उन्ही कार्मिकों और उसी समय में सभी सामाजिक समूहों की जातिगत जनगणना कराई जाने की मांग सामाजिक महापरिवर्तन गठबंधन करता है।
सभी वक्ताओ ने इस परिचार्चा मे बड़ी शालीनता से अपने विचार व्यक्त किये। अध्यक्षता कर रहे पूर्व न्यायमूर्ति माननीय वीरेंद्र सिंह यादव ने अपना वक्तव्य दिया।
आपको बता दें कि जातिगत जनगणना को लेकर जहां एक और बिहार में तेजस्वी यादव पूरी मुखरता से आवाज उठा रहे हैं तो वही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अब इस मुद्दे पर उनकी हां में हां मिलाने लगे हैं। अपितु दोनों ही नेता अलग-अलग पार्टियों एवं अलग-अलग विचारों के हैं बावजूद इसके जातिगत जनगणना के मुद्दे पर एक हैं।
जातिगत जनगणना को लेकर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी भी लिखी थी इसको लेकर उन्होंने 13 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने कहा कि ‘जातिवार जनगणना की माँग जात-पात की राजनीति नहीं बल्कि देशहित मानवहित में तथा गरीब व वंचित समाज के उत्थान के लिए एक अत्यावश्यक कदम है। कोई वर्ग यह ना समझे कि जातिगत जनगणना करवाना उनके हितों को दबाने वाला कदम होगा। जातिगत जनगणना देश के विकास में एक क्रांतिकारी कदम होगा’

यही कारण है कि जातिगत जनगणना के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुखों ने 23 अगस्त 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी एवं जातिगत जनगणना कराए जाने की बात कही थी। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव ने ट्वीट करके इसकी जानकारी देते हुए कहा कि ‘आज जातीय जनगणना के मुद्दे पर मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी सहित 10 पार्टियों के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री जी ने गंभीरता से हमारी बातों को सुना। केंद्र सरकार से हम सकारात्मक परिणाम की अपेक्षा रखते है’

 

वही 29 सितंबर की आपने एक ट्वीट में तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि ‘बहुत बड़े वंचित वर्ग के लिए गंभीर चिंता की बात है कि केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा प्रस्तुत कर कह दिया है कि 2021 में जातीय जनगणना “संभव नहीं होगी”। इस प्रकार केंद्र सरकार ने पूरे भारत की सामूहिक मांग को खारिज़ कर दिया। BJP का दोहरापन, वादाखिलाफ़ी और नौटंकी उजागर हुई।’

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हाल ही में एशियन न्यूज इंटरनेशनल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान को पब्लिश किया है जिसमें वे कह रहे हैं कि “हम लोग शुरू से कह रहे हैं कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए। इससे लोगों की स्थिति के बारे में जानकारी होगी और पता चलेगा कि कौन पीछे है। इससे उन लोगों को आगे करने के लिए बेहतर निर्णय हम ले सकेंगे। जातिगत जनगणना की ज़रूरत है यह हम लोगों ने शुरू से कहा है: बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार

वही 23 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद विकासशील इंसान पार्टी के सुप्रीमो मुकेश साहनी ने अपने ट्विटर पर लिखा कि’ आज माननीय मुख्यमंत्री श्री @NitishKumar जी के नेतृत्व में बिहार के सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी से मुलाकात किया। बैठक में सभी प्रतिनिधियों ने अपना विचार रखा। सबकी एकमत थी कि देश में जातीय जनगणना होनी चाहिए। मैंने भी जातीय जनगणना एवं समाज के अन्य मुद्दों को माननीय प्रधानमंत्री जी के सामने रखा। आशा है कि माननीय प्रधानमंत्री जी जातीय जनगणना के मामले में सकारात्मक निर्णय लेंगे। बिहार में एक कहावत है कि मछली से किसी काम की शुरुवात या जतरा शुभ होता है इसलिए मैंने माननीय प्रधानमंत्री जी को चांदी का मछली सप्रेम भेंट किया।

वहीं दूसरी ओर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (से०) के सुप्रीमो व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जातिगत जनगणना के मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद लिखते हैं कि ‘जातिय जनगणना मामले को लेकर आज आदरणीय प्रधानमंत्री.@narendramodi जी से सार्थक मुलाकात हुई। उन्होंने इस मामले के हर पहलुओं को बारीकी से समझा। उनसे मुलाकात और भाव से स्पष्ट है कि वह हमारे मांग पर जल्द ही राष्ट्रहित में सकारात्मक निर्णय लेंगें।’

इस तरह देखते हैं कि बिहार के लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां जातिगत जनगणना को लेकर एकमत है एवं यहां तक जाती है कि यदि केंद्र सरकार ऐसा नहीं करती है तो राज्य सरकारों को अपने खर्च पर जातिगत जनगणना करानी चाहिए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में केंद्र एवं राज्य सरकारों का रुख क्या होता है एवं बिहार से उठा आवाज अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस मुद्दे पर एक टेबल पर ला पानी में कितना कामयाब हो पाती है…???
उक्त कार्यक्रम के दौरान सभी संगठनों के आगंतुक वक्ताओं ने जातिवार जनगणना के पक्ष में अपने विचार रखें। इन वक्ताओं में प्रमुख रूप से दद्दु प्रसाद (पूर्व कैबिनेट मंत्री), राष्ट्रीय संयोजक सामाजिक परिवर्तन मिशन, जे. एस. कश्यप (एड.) हाई कोर्ट, राजीव रंजन अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट, प्रो. अवधेश कुमार(DU) , प्रो. हीरालाल (बिहार) जी कान्त पाल, प्रदेश अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग, राजेश कुमार (आरखेड) आदि वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

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