सात दिवसीय शोध प्रविधि कार्यशाला का हुआ शुभारंभ

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मोतिहारी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के चाणक्य परिसर स्थित पंडित राजकुमार शुक्ल सभागार में सोमवार से सात दिवसीय शोध प्रविधि कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ।

उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि छत्रपति शाहूजी महाराज कानपुर विश्वविद्यालय, कानपुर की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने मुख्य अतिथि प्रो. नीलिमा गुप्ता का स्वागत अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर किया। मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. अरुण कुमार भगत ने कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा का स्वागत किया। प्रो. अरुण कुमार भगत ने अपने स्वागत वक्तव्य में मंचासीन अतिथियों, संयोजक एवं शोधार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में पहली बार इस कार्यशाला का आयोजन हो रहा है जिसमें लगभग 70 शोधार्थी भाग ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 7 दिवसीय यह कार्यशाला ज्ञान के उत्सव के रूप में मनायी जाएगी।इस कार्यशाला में प्रतिदिन डेढ़ घंटे के चार सत्र होंगे जिनमे कुल 42 घंटे तक शोध के ज्ञान का प्रवाह होगा।

यह कार्यशाला ज्ञान का कुंभ है जिसमें हर शोधार्थी को नवीन संबंधों को ढूंढना होगा, शोध से सत्य की खोज होती है।

कार्यशाला की मुख्य अतिथि प्रो. नीलिमा गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि नए विश्वविद्यालय में एक साथ किसी कार्यशाला में इतनी बड़ी संख्या मे शोधार्थियों को कार्यशाला में देखकर पता चलता है कि विश्वविद्यालय में शोध कार्य हेतु शोधार्थी अनुकूल परिवेश है।

किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके शोध से होती है। शोध एक ऐसी चीज है जिसमें जितना इंवॉल्व होंगे उतना डूबते चले जाएंगे।रिसर्च का मतलब कोई चीज आप सर्च करते चले जाएं। हमें किसी लक्ष्य को लेकर नहीं चलना चाहिए बल्कि अपने कार्य को लेकर चलना चाहिए, शोध में कोई डिग्री नहीं छुपी होती है बल्कि यह सम्मान होता है, हमें हमेशा शोध में जुड़ा रहना होगा।

आज गूगल और कंप्यूटर की उपलब्धता है जिससे हमें ऑनलाइन लिटरेचर मिल जाता है जिसका कुछ लोग गलत इस्तेमाल करते हैं, हमें जो सुविधा मिली है उससे लाभ लेना चाहिए। रिसर्च में निष्ठा अनिवार्य है। उन्होंने सभी शोधार्थियों से कहा कि पहले कोर्स वर्क करें फिर विषय का चयन करें और उसके बाद शोध करें।

गाइड के बारे में उन्होंने कहा कि शोध में आपके गाइड़ की भूमिका सिर्फ रास्ता बताने की होती है। विषय का चयन खुद अपने रुचि के अनुसार करना चाहिए । शोध निर्देशक और शोधार्थी के मध्य संबंध अच्छे होने चाहिए।

रिसर्च के साथ-साथ शोध पत्र के प्रकाशन पर भी ध्यान देना आज की जरुरत है। रिसर्च में कभी निराशा नहीं होनी चाहिए, जब आप रिसर्च में इन्वॉल्व होंगे तो शोध कार्य में मन लगेगा। शोध निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि विश्वविद्यालय में कुछ दिन पहले शिक्षकों हेतु संकाय अनुप्रेरण कार्यक्रम हुआ जिसमें शिक्षकों को विश्वविद्यालय परिवार एवं यहां के प्रशासनिक कार्यों से अवगत कराया गया। आप भी हमारे नए शोधार्थी हैं व विश्वविद्यालय के नए परिवार से जुड़े हैं। हमारे पास पीएचडी में अलग-अलग जगह से शोधार्थी आए हैं। आज आप सभी इतिहास रच रहे हैं।

विश्वविद्यालय का यह पहला पीएचडी सत्र है और यह पहली कार्यशाला है। इस कार्यशाला में आप दूसरे विभागों के प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों से मिलेंगे। मनुष्य का पहला साक्षात्कार प्रकृति से हुआ है और प्रकृति के बारे में सोचना कि क्यों है, क्या है, यह सभी शोध है। शोध हमें जागृत करता है नई चीज को जानने के लिये। शोध में हमें प्रश्न की जिज्ञासा होती है जिज्ञासा का जागृत होना शोध है । प्रश्न निर्मित कैसे किया जाए उस पर भी ध्यान देना चाहिए। हमारा शोध प्रश्न कैसा होगा इन बातों पर हमें हमेशा चिंतन करना चाहिए।

गाइड के बारे में उन्होंने कहा कि गाइड का नाम हमेशा आपके साथ जुड़ा होता है, हमें सब कुछ सब से मिलकर सीखना है। शोध के विभिन्न आयामों पर हमें ध्यान देना होगा। अभी हमें सिर्फ शोध पर ध्यान देने की जरुरत है ।प्रौद्योगिकी और तकनीक भी हमें मिल गई है इससे चुनौतियां भी बढ़ गई है। आप लोगों के शोध की दिशा विश्वविद्यालय की दिशा निर्धारित करेगी। सुविधाएं का उपयोग हित के लिए करें, शोध पर हमेशा फोकस करें।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन मीडिया अध्ययन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुनील दीपक घोड़के ने दिया।

कार्यशाला के दूसरे सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध विशेषज्ञ डॉ. शैलेश कुमार कौशल ने शोधार्थियों से क्वालिटेटिव रिसर्च, क्वानटेटिव रिसर्च, कंसेप्ट ऑफ स्टेटिस्टिक्स, मेजर आफ सेंट्रल टेंडेंसी जैसे शोध तकनीक पर बारीकी से चर्चा किया। वहीं तीसरे सत्र में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय के अधिष्ठाता प्रो. पवनेश कुमार ने शोधार्थियों से रिसर्च के बेसिक पहलुओं, डाटा संकलन की विधि पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम का संचालन संयोजक ड़ॉ.परमात्मा मिश्र जी ने किया। कार्यक्रम के चौथे सत्र में पुनः लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध विशेषज्ञ डॉ. शैलेश कुमार कौशल ने शोध में प्रयोग किए जाने वाले सांख्यिकीय विधि, विभिन्न टेस्ट एवं एसपीएसएस के बारे में शोधार्थियों से विस्तार पूर्वक चर्चा की।

विशेषज्ञों का आभार मीडिया अध्ययन विभाग के पीएचडी शोधार्थी रजनीश कुमार त्रिपाठी और नवीन तिवारी ने ज्ञापित किया। कार्यशाला के प्रबंधन में कुमार मौसम, विकास कुमार, शैलेंद्र पाण्डेय, शोभित सुमन, हरिओम, अंतस, अभिजीत,चिनमई आदि ने सहयोग प्रदान किया।
यह सात दिवसीय शोध प्रविधि कार्यशाला विश्वविद्यालय के संगणनात्मक विज्ञान, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी संकाय द्वारा 27 जनवरी 2020 से 2 फरवरी, 2020 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश के ख्यातिलब्ध शोध विशेषज्ञ शोधार्थियों को शोध सम्बन्धी विभिन्न आयामों पर जानकारी देंगे।

कार्यशाला के द्वितीय दिवस में 28 जनवरी को प्रो.रंजीत कुमार चौधरी, नई दिल्ली से ड़ॉ.बी.एस.नेगी शोध के विविध आयामों पर शोधार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

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