“वेलेंटाइन डे ” स्पेशल…। वैलेंटाइन डे की पार्टी पूरे शबाब पर थी और फिर…!!!

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NTC NEWS MEDIA 

कभी कभी हम अपनी खुशियों में इतना मशगूल हो जाते हैं की हमें अपने घर के बुजुर्ग अथवा बीमार लोगों के होने का एहसास तक नहीं हो पाता है ।दूसरी ओर आज के पश्चिमी सभ्यता की अंधी दौड़ में संवेदना और सहानुभूति शब्द सिर्फ शब्द बनकर ही रह गए हैं। यही कारण है कि इस वैलेंटाइन डे के शोर में एक बूढ़ी मां की आवाज दबकर रह गई……. अब पूरी कहानी पढ़िए….

कमरे में उपस्थित लोग तेज संगीत पर डाँस और मस्ती कर रहे थे। रोहन और उसके दोस्तों के परिवार के साथ वैलेंटाइन डे की पार्टी पूरे शबाब पर थी ,जिसमे लिविंग रूम में हँसी ठहाकों के साथ कई तरह के लजीज व्यंजन मिठाइयाँ और ड्रिंक्स चल रहा था ।पूरे घर में लजीजदार खाने की खुशबू फैली हुई थी।इस पार्टी में खाने पीने की जबरदस्त व्यवस्था की गई थी।एक तरफ नर्म और गर्म पूरियां थीं तो दूसरी तरफ मटर पनीर की बहार थी।आलूदम और वेज मंचूरियन के स्वाद का तो कहना ही न था।खोए में लिपटी गाजर के हलवे की सोंधी सोंधी खुशबू से मुँह में पानी आ रहा था । गुलाब जामुन ऐसे लग रहे थे जैसे मुँह में डालते ही मक्ख़न की तरह पिघल जाएँ।

परंतु इस पार्टी के बीच रोहन की नौ साल की बेटी फलक बहुत उदास बैठी थी,क्योंकि इस पार्टी की तैयारियों में व्यस्त होने के कारण किसी को दादी का खाना और दवाइयों का ध्यान न था ।

जब फलक ने पापा मम्मी को दादी की याद दिलाया तो जोरों की डाँट पड़ गयी क्योंकि उन्हें शाम वाली पार्टी में कोई कमी न रहे इसकी ज्यादा चिंता थी।फलक को दादी से बेहद लगाव था ।दादी जबतक ठीक थीं उन्होंने फलक को पालने पोसने में किसी तरह की कोई कसर न छोड़ी थीं।

दादी पैरालिसिस अटैक से पीड़ित थी और सुबह से दवाइयाँ तो दूर उन्हें खाने को भी कुछ न मिला था ।वो भूख से बुरी तरह व्याकुल थीं पर किस्मत ऐसी खराब थी कि वो चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती थीं

फलक सबसे नज़रें बचाकर अपनी दोनों मुट्ठी में थोड़ी मिठाईयाँ लेकर स्टोर रूम पहुँची जहाँ किसी तरह से दादी को एक छोटे से बेड पे एडजस्ट किया हुआ था ।

इतना बड़ा चार बड़े बड़े कमरे का घर जिसे दादा दादी ने बड़े प्यार से बनाकर रोहन को उसके विवाह में तोहफा के तौर पर दिया था परंतू दादी को रानी की तरह रखने वाले दादा के मरने के बाद उस मकान में दादी के लिए जगह न थी।जबतक दादा जिंदा थे दादी को कभी भी इतनी देर तक भूखा प्यासा नहीं छोड़ते थे और घर पर कोई भी पार्टी होती तो पहला कौर दादी को ही खिलाते थे।दादा दादी ने काफी संघर्षों से ये मकान बनवाया था।साधारण कपड़े और साधरण खान पान के साथ उन्होंने जीवन बिताया ताकि ये घर बनवा सकें।

जब भूख प्यास से कराहते हुए दादी के मुँह में फलक ने जैसे ही मिठाइयाँ डाली ,दादी को अपने वैलेंटाइन दादा की याद आ गयी जिन्होंने जीते जी कभी दादी को भूखा न रहने दिया था।

दादी के शरीर में कोई हरकत न हो रही थी पर मिठाई खाते वक़्त आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे और फलक के लिए दुआएँ निकल रही थी

फिर अचानक दादी की गर्दन एक तरफ लुढक गयी और वो अपना वैलेंटाइन डे मानाने दादा के पास चली गयी जो उनका इंतज़ार काफी पहले से कर रहे थे ।

दादी माँ को मरा देख फलक की चीख वहाँ बज रहे तेज संगीत में दब कर रह गयी…….

Written By –

संजीव कुमार ,CEO next Generation Computer Pvt. Patna 

 

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