मोतिहारी वाले गाँधी जी से नकुल कुमार की मुलाकात… नाली, बिजली, सड़क समस्या ही समस्या

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NTC NEWS MEDIA

           बात यह है कि मैंने पटना वाले गांधी से मुलाकात पटना में जाकर कर ली। अपने चंपारण की व्यथा सुना दी। अब बारी थी मोतिहारी वाले गांधी जी की। मोतिहारी आया तो पता चला कि मोतिहारी वाले गांधी जी भी नाराज चल रहे हैं,क्योंकि मैंने पटना वाले गांधी जी से मोतिहारी की वास्तविक स्थिति जो बता दी थी। शायद यही कारण था कि काफी मशक्कत के बाद भी मोतिहारी वाले गांधी जी मुझसे एक शब्द भी नहीं बोले।

                     मैने उनको कई बार प्रणाम किया कई बार उनकी आंदोलन की याद दिलाया फिर भी नहीं बोले। फिर मैंने निकाला मोबाइल और एक सेल्फी क्या ले ली गांधी जी खुश हो गए। फिर गांधी जी से बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ ।

                गांधी जी ने मुझसे पूछा यह बताओ बेटा पटना वाले गांधी जी से तुमने और क्या-क्या कहा….??? और उन्होंने क्या कहा…?
मैने बताया कि जब मैंने पटना वाले गांधी जी से मुलाकात की तो पटना वाले गांधी जी मुझे देख कर बड़ी खुश हुए कि बेटा चंपारण से आया है। जहां से मैंने निल्हों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और किसानों को उनका हक दिलाया था। इसलिए आज के किसान वहां खुश होंगे किंतु स्थितियां पूरी तरह से किसानों के पक्ष में तो है नहीं। आए दिन किसान धरना प्रदर्शन करते रहते हैं इससे पटना वाले गांधी जी बड़ी दुखी हुए।

मैंने इतना क्या कहा कि मोतिहारी वाले गांधी जी तो फिर नाराज हो गए फिर से उन्होने मुंह फुला लिया ।मेरी तरफ देखे तक नहीं आंखें बंद कर ली और हे राम बोलते हुई चुप हो गए । फिर क्या मैंने फिर उनसे कहा की जानते हैं बापू मैंने पटनावाले गांधी जी से आप की बहुत ही बढ़ाई की और बताया कि हमारे मोतिहारी वाले जो गांधी जी है ना वह आपसे भी ऊंचे हैं हां।
वह अलग बात है कि आप का क्षेत्र (पटना)  ज्यादा डिवेलप है किंतु हमारे यहां एनएच बहुत अच्छा हो गया है भले ही गांव देहात की सड़के अभी भी थोड़ी बहुत खराब हो।
फिर मोतिहारी वाले गांधी जी ने पूछा कि जरा बताओ तो कि तुमने पटना वाले गांधी जी से और क्या-क्या कहा…?

फिर मेरी पटना वाले गांधी जी से जो सीक्रेट बात हुई थी मैंने उसको बताना शुरू किया:-

(1) डेंगू का प्रकोप और नगर परिषद द्वारा मच्छर की दवाई अर्थात फागिंग मशीन ना चलाना:-
मैंने पटना वाली गांधी जी को बताया कि देखिए गांधी जी मोतिहारी में सब कुछ तो ठीक है किंतु मच्छर का प्रकोप बड़ी बढ़ गया है पहले समय-समय पर फागिंग मशीन चला करती थी मच्छर दूर रहा करते थे कम से कम अच्छा लगा करते थे किंतु कुछ दिनों से यह मशीन चलने बंद हो गई है इसलिए मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है डेंगू के मरीज बढ़ने लगे हैं और इससे मौत भी होने लगी है।

(2) मोती झील की समस्या
मोतिहारी वाले गांधी जी को मैंने कहा कि बापू मैंने पटना वाले गांधी जी को मोतिहारी के मोती झील के बारे में भी बताया।
अब मोतिहारी की मोती झील तो साफ सुथरी हो गई किंतु समस्या यह है कि इसमें जो मछलियां हैं वह गर्मी के दिनों में बेचारी  तड़प तड़प के मरते हैं। क्योंकि पानी का लेवल तो 3 से .4 फीट का ही है और जब गर्मी का प्रकोप बढ़ता है तो पानी काफी गर्म जाता है जिससे मछलियां गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाती है और बिचारी तड़प तड़प कर मर जाती है इतना सुनना ही था कि गांधीजी फफक फफक कर रो पड़े ऐसे बुरे दिन आ गए की अहिंसा की भूमि पर मछलियां तड़प तड़प कर हिंसा का शिकार हो रही है गांधी जी ने कहा धिक्कार है ऐसे विकास पर।

(3) मोतिहारी के विभिन्न वार्ड में नाली की समस्या
नाली की समस्या तो जगजाहिर है भैया गांधी जी ने पूछा तो मैंने बता दिया कि मोतिहारी के कई वार्ड ऐसे हैं जहां लोगों को पानी बहाने के लिए नाली नहीं है मैंने अपने वार्ड के बारे में ही बता दिया कि मेरे वार्ड में भी पानी सड़कों पर बहता है कई वार्ड कमिश्नर बदल गए लेकिन स्थितियां बिगड़ती गई बदली नहीं है उसी तरह से मोतिहारी के कई बार ऐसे हैं जहां पर पानी सड़कों पर बहती है नाली जहां है वहां सही ढंग से बनी नहीं है उसमें से गाद निकला नहीं है और जहां नाली नहीं है वहां तो बदतर स्थिति है।
मैंने मोतिहारी वाले गांधी जी को बताया कि बापू मैंने इतना कहा ही था कि चंपारण की ऐसी व्यथा सुनकर पटना वाले गांधी जी फफक फफक कर रोने लगे। अब पटना वाले गांधी जी की कहानी जो हमारे मोतिहारी वाले गांधी जी सुन रहे थे वह भी रोने लगे। करण भाव से मोतिहारी के पिपरा वाले गांधी जी ने कहा कि बेटे ऊंचाई पर ही हूं किंतु शहर से इतना दूर हूं कि शहर की खबर मिली नहीं पाती है…..???

(4) जर्जर बिजली के खंबे और लटकते तार
मोतिहारी के कई बार ऐसे हैं जहां पर बिजली के खंभे वर्षों पुराने हो चुके हैं तारे जर्जर हो चुकी हैं हादसा किसी भी वक्त हो सकता है लेकिन इसकी पूछ किसको है कहां किसी को इतना समय है कि इस पर कदम उठा सके और   कोई कदम क्यों उठाए….. जनता को समस्याओं के साथ जीने की आदत जो पड़ गई है।  गांधी जी इतना क्या सुने फिर से भावुक हो गए।
आगे क्या क्या हुआ किन किन अन्य विषयों पर पटना और मोतिहारी वाले गांधी जी से बात हुई सब कुछ बताते रहेंगे।  बस पढ़ते जाइए……

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