मॉम अभी जिंदा है तो विक्रम और प्रज्ञान कैसे मर सकतें है…???

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27-09-2019/मोतिहारी / नकुल कुमार

मोतिहारी। भारतीय अंतरिक्ष संगठन इसरो के मंगल मिशन मॉम(MOM- Mars Orbiter Mission ) भले ही 6 महीने के लिए अनुसंधान के लिए गया हो लेकिन विगत 7 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहा है एवं मंगल ग्रह से जुड़ी हुई बहुत सारी जानकारियां इसरो के रिसीवर लैब में भेज रहा है जिससे कि भविष्य में मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं को तलाशने मैं मददगार साबित हो सकता है।   वहीं दूसरी ओर भारत के दूसरे चंद्रमा अभियान के तहत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भेजे गए chandrayaan-2 जिसमें ऑर्बिटल तो सही सलामत अपनी कक्षा में चक्कर लगा रहा है किंतु सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान विक्रम में लगे payload विक्रम की गति को नियंत्रित नहीं कर पाए यही कारण है कि विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग होने से 2 किलोमीटर पहले ही उससे संपर्क टूट गया।

संपर्क टूटने के कुछ दिन बाद ही इसरो के साइंटिस्टों द्वारा दावा किया गया कि विक्रम की लैंडिंग स्थल की जानकारी ऑर्बिटर द्वारा भेजे गए फोटो के माध्यम से दिया है जो कि एक तरफ टिल्टेड है। जिसके बाद लगातार 14 दिनों तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र एवं नासा द्वारा विक्रम से संपर्क साधने की पूरी कोशिश की गई किंतु इसमें अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है।

दिल चीज की बात यह है कि चंद्रमा की परिक्रमा कर रहे नासा के एक सेटेलाइट ने जिस क्षेत्र में चंद्रयान के विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग के दावे किए जा रहे हैं वहां के high resolution photo लिया है किंतु यह फोटो उस समय लिए गए हैं जिस समय चांद पर शाम का समय हो रहा है अर्थात सूर्य की रोशनी तिरछी पड़ रही है जिस कारण उस फोटो में परछाई इतनी ज्यादा है कि दूसरी तरफ काफी अंधेरा है यही कारण है कि अभी तक नासा अथवा इसरो यह ठीक-ठीक अथवा सटीक दावा नहीं कर पा रहे हैं कि जिस वस्तु की परछाई बन रही है वह तिरझा गिरा हुआ विक्रमी ही है।लाल घेरे में Lander Vikram

पिछले दिनों नासा ने ऐसे बहुत सारे फोटोग्राफ रिलीज किए जिसके बाद लोगों ने उन फोटोग्राफ्स को जूम करके कुछ परछाइयों को सर कल करके बताया कि यही विक्रम है जो कि तिरछा गिरा हुआ है किंतु नासा एवं भारतीय वैज्ञानिक चांद पर इस क्षेत्र में होने वाली सुबह का इंतजार कर रहे हैं जो कि अगले 14 दिन के बाद होगा तब तक विक्रम जिस क्षेत्र में भी गिरा हो उसे चांद के रात्रि में लोअर टेंपरेचर -180 डिग्री सेल्सियस तक को बर्दाश्त करना होगा।

मिशन चंद्रयान-2 की उम्मीदें अभी भी बरकरार…आर्बिटर ने लैंडर विक्रम को ढूंढा। संपर्क की कोशिश जारी

खैर उसके बाद विक्रम अथवा प्रज्ञान के मैकेनिकल पार्ट काम करें अथवा ना करें लेकिन कम से कम सूर्य की रोशनी में नासा अथवा भारतीय चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर द्वारा लिए गए हायर एजुकेशन फोटो से यह तो क्लियर हो जाएगा कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाने वाला पहला देश भारत है भले ही भारत सॉफ्ट लैंडिंग कराने में असफल रहा हो।

आपको बताते चलें कि भारतीय वैज्ञानिकों ने अपने पहले मून मिशन में चांद पर पानी होने की पुष्टि की थी जिसके बाद पूरी दुनिया में चंद्रयान 2 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करने के साथ ही बहुत सारी जानकारियां आने की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका फिर भी इसरो के चेयरमैन के सिवान का कहना है कि chandrayaan-2 अपने 98% मिशन में सफल रहा।

इन सबके बावजूद भारतीय वैज्ञानिक पूरी जोश खरोश के साथ अपने गगनयान अभियान में जुट गए हैं जिसके तहत भारत अपने वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में भेजेगा एवं ऐसा करने वाला वह अमेरिका रूस चाइना के बाद दुनिया का चौथा देश होगा।

आपको बताते चलें कि चांद पर अमेरिका रूस के साथ-साथ चाइना भी सॉफ्ट लैंडिंग करा चुका है और यदि भारत chandrayaan-2 के विक्रम को सॉफ्ट लैंडिंग कराने में कामयाब होता तो वह ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाता जिससे भारत के वैज्ञानिक अनुसंधान के रुतबे में काफी बढ़ोतरी होती।

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