पार्श्वगायन के क्षेत्र में खास पहचान बना चुके हैं अमर आनंद

Featured Post slide पटना बिहार मनोरंजन
  • 7
    Shares

खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,
        जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है,
        लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ऐ नादाँ,
जितनी गहराई अन्दर है, बाहर उतना तूफ़ान बाकी हैं।।     जाने माने पार्श्वगायक अमर आनंद ने पार्श्वगायन के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण पहचान बनायी है।उनकी ज़िन्दगी संघर्ष, चुनौतियों और कामयाबी का एक ऐसा सफ़रनामा है, जो अदम्य साहस का इतिहास बयां करता है। अमर आनंद ने अपने करियर के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया और हर मोर्चे पर कामयाबी का परचम लहराया।

                महान साहित्यकार फनीश्वर नाथ रेणु की जन्मस्थली बिहार के अररिया जिले के रानीगंज थाना के लक्ष्मीपुर गीतवास गांव में वर्ष 1990 में जन्में अमर आनंद के पिता श्री जगदीश यादव जाने माने लोक कथाकार और गायक हैं। छह भाइयों में सबसे बड़े अमर आनंद को कला की शिक्षा विरासत में मिली। बचपन के दिनों से ही अमर आनंद का रूझान संगीत की ओर हो गया था। वह अक्सर स्कूल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यकम में हिस्सा लिया करते जिसके लिये
उन्हें काफी प्रशंसा मिला करती।

  जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना
   सोच पक्की और क़दमों में रफ़्तार रखना
   कामयाबी मिल जाएगी एक दिन निश्चित ही तुम्हें
   बस खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार रखना।
उदित नारायण को अपना आदर्श मानने वाले अमर आनंद को वर्ष 1992 में छठ के अवसर पर अररिया जिला में लगे गीतवास मेला में पार्श्वगायन का अवसर मिला जिसने उनकी तकदीर बदल दी। हुआ कुछ यूं कि अमर गीतवास मेला देखने गये थे।
गीतवास मेला के आयोजक दिलीप मंडल से अमर ने गाना गाने की इजाजत मांगी। दिलीप मंडल , अमर की प्रतिभा को जानते थे और उन्होंने अमर को इसका अवसर दिया। अमर आंनद ने गीतवास मेला में अपने लाजवाब पार्श्वगायन से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके लिये उन्हें सम्मानित भी किया गया। इसके बाद
अमर की ख्वाति चारो ओर हो गयी।

        जुनूँ है ज़हन में तो हौसले तलाश करो
        मिसाले-आबे-रवाँ रास्ते तलाश करो
        ये इज़्तराब रगों में बहुत ज़रूरी है
        उठो सफ़र के नए सिलसिले तलाश करो
वर्ष 2004 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमर आनंद आंखो में बड़े सपने लिये राजधानी पटना आ गये। इसके बाद अमर आनंद ने बिहार , उत्तर
प्रदेश ,झारखंड और पश्चिम बंगाल में कई मंचो पर पार्श्वगायन किया जिसके लिये उन्हें काफी तारीफें मिली। वर्ष 2009 में अमर आनंद ने रियालिटी शो
सुर संग्राम में शिरकत की हालांकि वह शो के विजेता नही बन सके लेकिन उपविजेता के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हुये।
रख हौसला वो मन्ज़र भी आएगा,
        प्यासे के पास चल के समंदर भी आयेगा;
        थक कर ना बैठ ऐ मंज़िल के मुसाफिर,
        मंज़िल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आयेगा।

वर्ष 2010 अमर आनंद के करियर के लिये सुनहरा वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उन्हें उनके आदर्श उदित नारायाण के साथ किसना कइलस कमाल में गोरी तेरे इश्क में मरजावां में पार्श्वगायन का अवसर मिला। इसी वर्ष वह नवरत्न सम्मान से भी नवाजे गये। वर्ष 2012 में अमर आनंद को दूरदर्शन के टेली फिल्म माटी के लाल में पार्श्वगायन करने का अवसर मिला जिसके लिये उन्हें काफी ख्याति मिली। अमर आनंद को बिहार कला सम्मान के अन्तर्गत विध्यवासिनी देवी युवा पुरस्कार और स्वामीविवेकानंद युवा पुरस्कार समेत कई राज्यस्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

Advertisements

          वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ
             हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है
अमर आनंद को हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग ने अररिया जिला का ब्रांड
अम्बेसडर बनाया है। अमर आनंद अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार के सभी लोग
और शुभचिंतको के साथ ही अपनी मां स्वर्गीय रामवती देवी को देते हैं जिन्होंने उन्हें हमेशा सपोर्ट किया।

https://youtu.be/v72wJA_ecVc

https://youtu.be/eluxMjSiIlg

https://youtu.be/B-CVK05ePig

अन्य ख़बरें

ठनका गिरने से हुई मौत मामले में पीड़ित परिवार को मिला 4-4 लाख का चेक।
वाणिज्य प्रकोष्ठ की बैठक में आगामी चुनाव में जीत को लेकर विचार विमर्श
मिस इंडिया दिवा की फायनलिस्ट बनी आकांक्षा, पिता है बिजनेसमैन तो वही मां है पुलिस ऑफिसर
प्रेमी ऑटोवाला का ट्रेलर रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया में मचा रहा हैं धूम।
गेस्ट हाउस का हुआ उद्घाटन.....
भारत के नौजवान सभा(DYFI) की रैली 15 Sep. को, DM को सौंपेंगे मांग पत्र
मोतिहारी में प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर नमामि गंगे सहायतार्थ नीलाम की गई उपहारों की लगी प्रदर्...
सशक्त लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि प्रतेयक मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करे: अखिलेश कुमार सिंह, ...
दूरसंचार कोरोना वारियर्स के लिए पूर्व मंत्री ने उपलब्ध कराया सैनिटाइजर
सेवा सप्ताह के अवसर पर प्लास्टिक वस्तुओं के उपयोग की समाप्ति जल संरक्षण तथा संवर्धन पर सेमिनार का आय...
मुजफ़्फ़रपुर में बेख़ौफ़ बदमाशो ने सरेआम पुलिस को  मारी गोली, लूटा कार्बाइन।
केंद्रीय विश्वविद्यालय में महिलाओं के सम्मान में चला हस्ताक्षर अभियान, मानव श्रृंखला निर्माण एवं साम...
महादलित बस्ती में आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों के बीच कॉपी, पेंसिल, कटर, रबड़ और पौष्टिक आहार का वितरण
बी फॉर नेशन ने कोरोना वायरस को लेकर चलाया जागरूकता अभियान
अपनी दमदार प्रस्तुति के बल पर संगीत के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बना चुकी है प्रिया राज
मेरे गुरु मेरे मार्गदर्शक: रजत पाठक की कलम से
चिरैया में खुला कंप्यूटर सेंटर, गरीब छात्रों को मिलेगा 50% डिस्काउंट
गृह मंत्रालय: नाइट कर्फ्यू, रात 9:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक
CAA एवं NRC के समर्थन में ABVP का जुलूस
"स्वच्छता ही सेवा" के अंतर्गत प्रधानमंत्री के जीवन पर बनी लघु फिल्म "चलो जीते हैं" दिखाई गई।

  • 7
    Shares

Leave a Reply