छात्र का हिंदी दर्द …हिंदी पर मुझे गर्व लेकिन प्रतियोगिता परीक्षाओं में अंग्रेजी को महत्व क्यों…???

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NTC NEWS MEDIA /हिन्दी दिवस

कल हिंदी दिवस था। हिंदी दिवस पर बहुत सारे औपचारिक कार्यक्रम करके हिंदी दिवस को सेलिब्रेट किया गया होगा, किंतु हिंदी का वास्तविक मर्म जो है जिससे छात्रों की आत्मा आहत है उसके बारे में आपको जानकारी कंपटीशन की तैयारी कर रहे हैं छात्र ही दे सकतें हैं । तो आइए आज आपको एक छात्र का हिंदी दर्द आपको सुनाते हैं…..

 रजत पाठक  एक छात्र हैं जो मोतिहारी में रहकर कंपटीशन की तैयारी करते हैं  हिंदी दिवस पर उन्होंने अपने दिल का दर्द  जिसको आप हिंदी दर्द भी कर सकते हैं  बयान किया कि किस तरह से  हर कंपटीशन में अंग्रेजी को  बड़े भाई की तरह  प्राथमिकता दी गई है  चाहे वह बैंकिंग हो  चाहे इंजीनियरिंग हो  चाहे  मेडिकल हो ……….. क्या कहते हैं रजत पाठक उनकी इन शब्दों में पढ़िए

           हमलोग जिस देश में रहते हैं,उस देश की मातृभाषा हैं,हिन्दी. मैं राष्ट्र का नागरिक होने के नाते हिन्दी पढ़ रहा हूँ लकीन पता नही हिन्दी पढ़ने से नौंकरी भी मिलेगी या नहीं. आज जैसे धीरे धीरे हर जगह अंग्रेजी को प्रधानता दी जा रही हैं, लगता है आने वाले समय में हिंदी की महत्ता को ही ना समाप्त कर दी जाए । दूसरी ओर जब हम स्कूल-कॉलेजों में जाते हैं तो वहां अंग्रेजी बोलने वाले बच्चे खुद को ज्यादा ओवर स्मार्ट समझते हैं कहीं ना कहीं अंग्रेजी को प्राथमिकता दी जा रही है तभी उनमें अपनी मातृभाषा हिंदी के प्रति कम एवं अंग्रेजी के प्रति गर्व का भाव ज्यादा है। सरकार को सिर्फ हिंदी दिवस मना कर इतिश्री नहीं कर लेना चाहिए बल्कि बैंकिंग सेक्टर में भी हिंदी को महत्व दिया जाना चाहिए।

                       हम सभी देशवासी को “हिन्दी ” मातृभाषा होने के नाते हिन्दी का सम्मान करना चाहिए । अंग्रेजी अथवा अन्य भाषाएं उतनी समृद्धि नहीं है जितनी की हिंदी है । हिन्दी ही एक मात्र ऐसी भाषा हैं, जिससे हमको संस्कार मिलती हैं. हिन्दी भाषा में हम जैसा लिखते है वैसा ही पढ़ते है. हिन्दी ही एक मात्र ऐसी भाषा हैं जिसमे सभी रिस्ते के लिए अलग अलग शब्द होते हैं. इस भाषा से हमे अपन्तव और भारतीयता होने का आभास होता है।

              हिन्दी ही एक येसी भाषा है जिसमे फ़ारसी,अरबी,अंग्रेजी आदी भाषा भी समील हैं. आप हिन्दी वर्ण माला को देखें तो “अ” से अनपढ़ से शुरू होकर “ज्ञ” से ज्ञानी बना के छोड़ती है. हिन्दी भाषा एकमात्र येसी भाषा है जिस पर अनेक जुल्म हुए है,और अनेक राज़ बंस और अंग्रेज हमारी भाषा को खत्म करने की कोशिश कर चुके है मगर फिर भी हिन्दी भाषा को मार नही पाए क्युकी हिन्दी ऐसी भाषा है जो लोगो के जुबान में चढ़ जाती हैं. और भी बहुत कुछ है इस भाषा की जीतनी भी, किसी और भाषा से तुलना की जाए या प्रशंसा की जाए कम ही है.

अत : हम सभी देशवासी को हिन्दी दिवस के अवसर पर आज ये शपथ लेनी चाहिए कि हम सभी अपने राष्ट्रभाषा की सम्मन करें एवं अपनी सरकार से दरख्वास्त करूंगा कि जिस तरह से कंपटीशन में अंग्रेजी को महत्व दिया गया है उसी तरह से अंग्रेजी के महत्व को खत्म करके हिंदी को महत्व दिया जाए ताकि छात्र किसी अंग्रेजी भाषा को बोलकर गर्भ ना मैसेज करें बल्कि हिंदी भाषा को बोलकर गर्व महसूस करें एवं अपने को अपनी मिट्टी अपने देश से जुड़ा हुआ महसूस करें।
आपका :-
रजत कुमार पाठक
एस एफ आई मोतिहारी
तो इस प्रकार आपने देखा कि एक कंपटीशन की तैयारी करने वाले छात्र कि मन में हिंदी का दर्द भयभीत किया हुआ है किंतु हिंदी प्रेम भी कूट कूट कर भरा  वह यही कारण है कि एक तरफ छात्र सरकार से दरख्वास्त कर रहे हैं कि हिंदी को प्राथमिकता दी जाए वहीं दूसरी ओर हिंदी प्रेम को भी जाहिर कर रहे हैं।

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