कुर्सियां भी बतियाती होंगी: मंटू कुमार सुशील ( करोड़पति सुशील कुमार)

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NTC NEWS MEDIA / Motihari

 चंपारण में चंपा से चंपारण के नायक करोड़पति सुशील कुमार आजकल चंपा यात्रा पर निकले हुए हैं और इसके साथ गांव गांव गली गली मोहल्ले मोहल्ले अपनी स्कूटी से जाते हैं वहां चंपा का पौधा लगाते हैं उसके आसपास ग्रामीण संस्कृति को अपने मोबाइल कैमरे में कैद करते हैं ।

क्षण भर के लिए उस संस्कृति में जीते हैं अपनी बचपन की यादों को ताजा करते हैं और फिर उसे सोशल साइट पर पोस्ट करके हम जैसे लोगों को कुछ लिखने के लिए मैटर दे देते हैं।

 अब आपको बताते हैं सुशील कुमार ने ऐसा क्या लिखा जिससे लग रहा है कि उन्होंने कुछ मैटर से दे दिया है हम जैसे लोगों को कुछ लिखने के लिए,  और हां लोकसभा का चुनाव भी नजदीक है । खुद तो चुनाव में उनको खड़ा होना नहीं है, कुर्सियां उनको मिली बैठने के लिए लेकिन इस डर्टी पॉलिटिक्स ने उन्हे कुर्सी पर ही लिखने के लिए विवश कर दिया।

आपको यह भी बता दूं कि करोड़पति सुशील कुमार कोई  प्रोफेशनल कवि नहीं है लेकिन हृदय के तार कभी कभी जुड़ जाते हैं तो पंक्तियां निकाल आती है  और चंपा यात्रा के दौरान ऐसी पंक्तियों का निकलना स्वभाविक है ।

आजकल अपने संगीत वाले गुरु जी के यहां सितार जरूर सीख रहे हैं वह भी मोतिहारी के इकलौते सितार वाले गुरुजी और वह सितार भी मोतिहारी में इकलौता ही है जिसके तार भी कभी कभी टूट जाते हैं । वह तो भला हो सुशील कुमार का जिन्होंने उस सितार को और उसके तार को जोड़े रखा है।

अब आपको ज्यादा पढ़ने पर विवश नहीं करेंगे लेकिन संदर्भ है तो बताना जरूरी है कि आजकल सुशील कुमार चंपा से चंपारण अभियान के तहत चंपा यात्रा पर निकले हैं और इसके तहत वे गांव गांव घूम घूम कर चंपा का पौधा लगा रहे हैं उनका टारगेट है कि इस 1 साल में पूरे चंपारण में चंपा का वृक्षारोपण कर देना है।

 अब भैया हम आपको बताते चलता हूं कि  सुशील कुमार  जो चंपा यात्रा कर रहे हैं  उस के दौरान  काका करते हैं  किन-किन चीजों से मिल रहे हैं….?

इस चंपा यात्रा के दौरान वे बहुत चीजों से रूबरू हो रहे हैं। चाहे वह बच्चे हो, चाहे वह खटिया हो, चारपाई हो,पेड़ हो, मकान हो, दुकान हो, चिड़िया हो, भिन्न-भिन्न तरीके के लोग हो, सब कुछ वे अपने मोबाइल कैमरे में कैद करते हुए अपनी स्कूटी से आगे बढ़ते हैं। मोबाइल कैमरे में कैद 4 कुर्सियों पर उन्होंने एक कविता लिखी है और आपको बताते चलें कि एक उन्हें ये कुर्सिया बैठने के लिए पूर्वी जयसिंहपुर पंचायत के माधव टोला में त्रिलोकी नाथ मिश्रा जोकि एक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हैं के यहां मिली थी।

अब भैया सुशील कुमार तो सुशील कुमार ठहरे उन्होंने कुर्सी की फोटो तो ली साथ ही साथ उस पर एक कविता भी बना दी । तो भैया भाग्य कुर्सी का ही है, जिसका फोटोग्राफर करोड़पति है। हम लोग तो रोडपति को भी फोटोग्राफर बना लेते हैं। कुर्सी पर लिखी हुई करोड़पति एवं चंपा यात्रा  के साक्षी सुशील कुमार की कविता पढ़िए……

कभी कभी खाली कुर्सियां भी
अकेले में बतियाती होंगी
बैठने वालों के बारे में
उनके अच्छे बुरे बैठने
के तरीकों पे

उनको सर पे बैठाने या
सीधे पटक कर नीचे रखने
वालों के बारे में

उनको देख कर लार टपकाते
किसी सफेदपोश के बारे में
उनको पाने के लिए
अपनाये जाने वाले
ढोंग और हथकंडों
के बारे में
उनको लेकर होती
मारामारी के बारे में

कुर्सियां भी बतियाती होंगी
हमारी या तुम्हारी तरह
पर वो कभी साजिश
नही रचती होंगी
बस वो साजिशों
की मूकदर्शक
बनी रहती होंगी।

जब वे लोग चले जाते होंगे तब
उनकी बेवकुफीयों पे
हँस हँस कर जरूर बतियाती होंगी
क्योंकि कुर्सियां गवाह होती है
उन जैसे बहुतेरे लोगों की
जो रोज ब रोज ऐसी वैसी
न जाने कितनी बेवकूफियां
फिजूल की करते होंगे
क्योंकि झूठी शान और अंतर्मन
में आजीवन व्याप्त भय/आत्मग्लानि/ के
अलावा साजिशों से
कुछ हासिल नही होता
ये बात कुर्सियों को भी पता है सिर्फ इसलिए क्योंकि इंसान उस पे बैठ के अपने सारे अनुभव किसी न किसी से बताता जरूर है।


सुशील
29.09.2018
#चम्पायात्रा

तो इस तरह से देखा आपने किस तरह से सुशील कुमार ने अपने चंपा यात्रा के अनुभव को साझा किया है और कविता के माध्यम से जिस ढंग से उन्होंने इसकी विवेचना की है वह बार-बार सोचने को विवश करता है की एक ओर जहाँ कुर्सियों के लिए मारामारी चल रही है तो वहीं दूसरी ओर कुर्सियां अपनी आपबीती भावनाएं एक दूसरे से शेयर कर रही हैं।

यहां कुर्सियों का एक दूसरे से अपनी भावनाओं को शेयर करना सिर्फ संकेत मात्र है वास्तव में यह अपने सिस्टम पर चोट करता है , और इसमें भरे वैमनस्यता पर प्रहार करता है।

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