कार्यपालिका की संसद के प्रति जवाबदेही विषय पर तीन दिवसीय कार्यक्रम का हुआ आयोजन

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दिल्ली। आज संसद भवन के द प्राइड मेन लेक्चर हॉल में ‘कार्यपालिका की संसद के प्रति जवाबदेही’ के विषय पर आयोजत तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए रेलवे संबंधी स्थायी समिति सभापति सह मोतिहारी सांसद राधा मोहन सिंह ने कहा कि किसी भी शासन प्रणाली की प्रभावकारिता इस बात पर निर्भर करती है कि इसमें लोगों का प्रतिनिधित्व कितनी अच्छी तरह से किया जाता है,उनकी समस्याओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है और उनकी आशाओं और आकांक्षाओं को कैसे पूरा किया जाता है।

पूर्व मंत्री ने कहा कि लोगों की संप्रभु इच्छा से पूरे विश्व में कई देशों में संसदीय लोकतंत्र को शासन प्रणाली के रूप में अपनाया गया है। यह एक सहभागितापूर्ण प्रणाली है जिसमें जनता, संसद और सरकार अपनी-अपनी जिम्मेदारियां और भूमिकाएं निभाते हैं । लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सुशासन सुनिश्चित करने के लिए यह एक प्रभावी साधन बन गया है।

श्री सिंह ने कहा कि संसदीय प्रणाली के अंतर्गत कार्यपालिका और विधायिका के प्राधिकारी मिलकर काम करते हैं। कार्यपालिका और विधायिका के बीच बहुत घनिष्ठ संबंध है और इसमें किसी प्रकार का वैर-विरोध नहीं है। दोनों अंगों की संकल्पना सत्ता के प्रतिस्पर्धी केंद्रों के रूप में नहीं बल्कि सरकार के कामकाज में अभिन्न भागीदारों अथवा सहभागियों के रूप में की गई है।

इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि आज संसद अनेक कार्य कर रही है । संसद की कुछ महत्वपूर्ण भूमिकाओं और कार्यों में कानून बनाना, वित्तीय कार्य, कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करना, संवैधानिक कार्य करना, जनप्रतिनिधियों की भूमिका निभाना, शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना, राष्ट्रीय एकता सुनिश्चित करना, जानकारी संबंधी कार्य करना, नेताओं का प्रशिक्षण और इसके साथ ही अन्य विविध कार्य भी शामिल हैं।? संसदीय लोकतंत्र के साथ जुड़ी धारणाओं और इसके मूलभूत सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए संसद के कार्यों का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस प्रणाली में न केवल कार्यपालिका का गठन संसद में से होता है बल्कि यह अपने सभी कार्यों के लिए संसद के प्रति जवाबदेह होती है। कार्यपालिका की संसद के प्रति जवाबदेही इस सिद्धांत पर आधारित है कि चूंकि संसद जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए इसे कार्यपालिका पर निरंतर निगरानी रखते हुए इसे अपने नियंत्रणाधीन रखना चाहिए।
? कार्यपालिका पर संसद के नियंत्रण के अनेक पहलू हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार लोगों की भलाई के लिए सभी संभव प्रयास करे। संसद द्वारा की जाने वाली निगरानी यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि कार्यपालिका द्वारा शक्तियों का दुरुपयोग न किया जाए और कुशासन को रोका जा सके। कार्यपालिका की नीतियों और कार्यक्रमों की संसद द्वारा लगातार जांच की जाती है।
?संसदीय प्रणाली के अंतर्गत प्रशासन चलाने वाली राजनीतिक कार्यपालिका को जनादेश प्राप्त होता है और संसद के माध्यम से लोगों के प्रति इसकी जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।
? संसदीय पद्धतियां और प्रक्रियाएं संसदीय प्रणाली का अभिन्न अंग होती हैं। भारत में संसदीय प्रणाली में अनेक जटिल पद्धतियां और प्रक्रियाएं विकसित की गई हैं। इनसे सदस्यों को सभा में विभिन्न मुद्दे उठाने और कार्य का संचालन सुचारु और सुव्यवस्थित ढंग से करने में मदद मिलती है।
?ऐसी अनेक संसदीय पद्धतियां और प्रक्रियाएं हैं जिनका उद्देश्य लोगों के लिए महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक वाद-विवाद और चर्चा सुनिश्चित करना और इसे विनियमित करना है। हालांकि मूलभूत सिद्धांत और प्रक्रिया नियम वही रहते हैं, तथापि संसदीय तकनीकें, पद्धतियां और साधन सदैव विकसित होते रहते हैं और बदलती परिस्थितियों के अनुसार इनमें वृद्धि होती रहती है।
? इस संबंध में, कुछ प्रक्रियात्मक साधन और पहलें उल्लेखनीय हैं जिनसे सभा के कार्य संचालन में बहुत मदद मिली है। आधे घंटे की चर्चाएं, अल्पकालीन चर्चाएं, ध्यानाकर्षण सूचनाएं, लोक सभा में नियम 377 के अंतर्गत मामले उठाना और राज्य सभा में विशेष उल्लेख, कार्य मंत्रणा समिति, सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति और सभा पटल पर रखे जाने वाले पत्रों संबंधी समिति और निदेश 73क कुछ ऐसे ही महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक साधन हैं। इनके अलावा, ‘शून्य काल’ को एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है जिससे सदस्यों को हाल ही में हुई किसी घटना से संबंधित मामले उठाने में मदद मिलती है। पहले से विद्यमान अनेक अन्य प्रक्रियात्मक साधनों के साथ ही इन सभी साधनों से सदस्यों को कार्यवाही में प्रभावी ढंग से भाग लेने के अवसर प्राप्त होते हैं तथा कार्यपालिका की संसद के प्रति अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
? संसदीय प्रश्न लोक महत्व के मामलों पर सरकार से जानकारी प्राप्त करने हेतु सदस्यों को उपलब्ध एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक साधन है। कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद की कार्यवाहियों में प्रश्न काल का विशेष महत्व है।
?लोक सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के नियम 377 के अधीन सदस्य अध्यक्ष की पूर्व अनुमति से सभा के समक्ष ऐसे किसी मामले को उठा सकते हैं जो व्यवस्था का प्रश्न न हो और जिसे नियमों के अंतर्गत अन्यथा न उठाया जा सकता हो ।
?अविलंबनीय लोक महत्व के मामले की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए सदस्यों के पास अल्पकालीन चर्चा नामक एक अन्य संसदीय साधन उपलब्ध है।?स्थगन प्रस्ताव का प्राथमिक उद्देश्य गंभीर परिणाम वाले अविलंबनीय लोक महत्व की हाल की किसी घटना पर सभा का ध्यान आकृष्ट करना है जिसके संबंध में उचित सूचना के साथ कोई प्रस्ताव या संकल्प लाने में काफी विलंब हो सकता है। उठाया जाने वाला प्रस्तावित मामला काफी गंभीर प्रकृति का होना चाहिए ।
? मंत्रिपरिषद में अविश्वास संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाना लोक सभा के सदस्यों को उपलब्ध एक अति महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार है।
? सरकारी व्यय पर संसद का नियंत्रण, एक जवाबदेह और उत्तरदायी प्रशासन का एक अनिवार्य पहलू है। यह अनिवार्य है कि सार्वजनिक निधियों में से किया गया व्यय विवेकपूर्ण ढंग से किया जाए, संसाधन व्यर्थ न जाएं, धन का कोई दुरूपयोग न हो, अनुदान जल्दबाजी में न दिए जाएं, जनता पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार न डाला जाए तथा खर्च की गई निधि से उपयुक्त परिणाम प्राप्त हों। चूंकि राजस्व नागरिकों से प्राप्त होता है, अत: सरकार का यह नैतिक कर्त्तव्य है कि धन को प्रभावी और किफायती ढ़ंग से खर्च किया जाए ।
? विभागों से संबद्ध स्थायी समितियों के कार्य में पहले के मुकाबले अब काफी प्रक्रियात्मक सुधार हुआ है क्योंकि अब इन समितियों द्वारा सभी मंत्रालयों/विभागों की मांगों की बारीकी से जांच की जा रही है जिससे संसद के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही काफी बढ़ गई है।
?सामान्यत यह माना जाता है कि कार्यपालिका की शक्तियां लगातार बढ़ रही हैं, परंतु पिछले कुछ वर्षों में सरकार के कार्यों की सीमा, महत्व और जटिलता में काफी वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप, पूरे विश्व में विधायिका के लिए सरकार के कार्यों के आलोचक के रूप में अपनी भूमिका निभाना दिनोदिन मुश्किल होता जा रहा है।

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