आयुष्मान भारत योजना-2018 ( By- Journalist Nakul Kumar )

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Nakul Kumar/Motihari                                    30.05.2018
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                         आयुष्मान भारत योजना भारत सरकार की बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य योजना है जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले लोगों के इलाज हेतु 500000 तक की राशि हेल्थ कार्ड के माध्यम से मुहैया कराना है यह राशि इस स्कीम के तहत registered लोगों को ही उपलब्ध कराई जाएगी।
                         इस स्कीम के तहत लोगों को निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी……

(1) Health card
                          आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के 50000000 परिवारों का हेल्थ कार्ड होगा जोकि परिवार के 5 सदस्यों का हेल्थ बीमा कवर करेगा इस तरह से पूरे देश में लगभग 50 करोड़ लोगों के हेल्थ कार्ड बनाए जाने की तैयारी है

(2) SECC-2011
(Socio Economic and Cast Census- सामाजिक आर्थिक एवं जातिगत जनगणना 2011)
                           मोदी सरकार के आयुष्मान भारत योजना का लाभ उन्हीं लोगों को मिल पाएगा जिनका नाम 2011 के सामाजिक आर्थिक एवं जातिगत जनगणना के तहत नाम जुड़ा होगा।

(3) पारिवारिक स्थिति
                            मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना का लाभ एक परिवार की ओर से 5 सदस्य को ही मिल पाएगा यदि उस परिवार में सदस्यों की संख्या 5 से अधिक होगी अथवा फैमिली जॉइंट होगी तो उस परिस्थिति में क्या होगा इस के संदर्भ में एडवाइजरी जारी की गई है कि आने वाले समय में उन्हें भी कवर किया जाएगा।

(4) Health Wellness Center
                           आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए उनके स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पूरे भारत में लगभग डेढ़ लाख हेल्थ वेलनेस सेंटर की स्थापना की जाएगी जिसके लिए 1200 करोड़ रुपए बजट का प्रावधान किया गया है।

(5) योजना क्रियान्वयन के चरण
                इस हेल्थ योजना का क्रियान्वयन 3 चरणों में संपन्न होगा, जो प्रथम चरण के तुरंत बाद ही शुरू किया जाएगा।

(6) खर्च
                सरकार ने लोगों के हेल्थ को सुनिश्चित करने के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत इस हेल्थ स्कीम पर 5000 से लेकर 6000 करोड़ तक का बजट तय किया है जिसकी अनुशंसा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018 19 के बजट में की थी

(7) केंद्र राज्य अनुपात इस योजना के प्रीमियम भुगतान में किए गए व्यय में केंद्र-राज्य अनुपात भी सुनिश्चित किया गया है जिसके तहत लक्ष्य 60:40 के रुप में रखा गया है अर्थात् इस प्रीमियम पर जो खर्च होगा उसका 60% केंद्र सरकार वाहन करेगी एवं 40% राज्य सरकार वहन करेगी।

(8) आवश्यक कागजात
आधार कार्ड
आधार कार्ड से लिंक बैंक अकाउंट
पहचान पत्र
परिवार प्रमाण पत्र
आय प्रमाण पत्र
आयु प्रमाण पत्र
कांटेक्ट डिटेल्स

                     मालूम हो कि इस आयुष्मान भारत हेल्थ योजना की शुरुआत घोषणा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018 19 बजट के दौरान की थी और इसके लिए ₹6900 का बजट निर्धारित किया गया इतना ही नहीं लगभग डेढ़ लाख वेलनेस सेंटर की स्थापना करने के स्थापना करने के लिए 1200 का लक्ष्य रखा गया वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यहां तक कहा था कि आयुष्मान भारत स्कीम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी हुई स्कीम हैं जो कि प्रधानमंत्री जी के सबका साथ सबका विकास के लक्ष्य को ही पूरा करने के तहत पिलाई गई है इसके तहत प्रत्येक परिवार का बीमा किया जाना है ताकि वह भी समय पर सभी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ ले सके।

                       किंतु सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर इस हेल्थ कार्ड को लेकर जनता जाएगी कहां …….? स्वभाविक है कि जनता प्राइवेट हास्पिटल का ही रुक करेगी जब तक कि डेढ़ लाख हेल्थ वेलनेस सेंटर की स्थापना नहीं हो जाती है और इसका साइड इफेक्ट यह होगा कि प्राइवेट हॉस्पिटलों की चांदी ही चांदी होगी और सरकारी हॉस्पिटल, जो कि पहले से ही बदहाल स्थिति में हैं और भी अपनी बदहाली की तरफ बढ़ते चले जाएंगे।।
                        पहले से ही देश में लाखों सदा हॉस्पिटल एम्स एवं राज्य स्तर पर हॉस्पिटल अपनी सेवाएं दे रहे हैं जोकि पूरी तरह से अच्छी स्थिति में नहीं है जहां पर आधुनिक मशीनों एवं आधुनिकता का अभाव है सरकार ने जो 6000 करोड़ का बजट आयुष्मान भारत पर एवं 1200 करोड़ का बजट हेल्थ वेलनेस सेंटर स्थापित करने के लिए सुनिश्चित किया है यदि यह राशि पहले से मौजूद सरकारी हॉस्पिटलों एवं मेडिकल कॉलेजों की स्थिति सुधारने में की जाती उन्हें विभिन्न आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस करने में की जाती तो इस तरह के किसी भी स्क्रीन की आवश्यकता पड़ती ही नहीं।
  इसमें कोई दो राय नहीं थी जनता यह हेल्थ कार्ड लेकर प्राइवेट हॉस्पिटलों का ही रुप करेगी क्योंकि वहां उन्हें विभिन्न आधुनिक सुख सुविधाएं एवं इलाज के साधन उपलब्ध होंगे सरकारी हॉस्पिटल जो पहले से ही बदहाल स्थिति में है वहां तो जाएंगे नहीं इस स्थिति में इसका साइड इफेक्ट यह होगा कि आयुष्मान भारत के माध्यम से हेल्थ सेक्टर धीरे धीरे प्राइवेटाइजेशन की ओर अग्रसारित हो जाएगा इस परिस्थिति में भविष्य की स्थिति का आकलन आप स्वयं कर सकते हैं
मोदी सरकार से पहले कांग्रेस के समय में ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना चल रही थी जिसमें पहले ₹30000 का प्रावधान था जिसको बाद में कांग्रेस गवर्नमेंट में ही बढ़ाकर इसको एक लाख तक कर दिया गया था मोदी सरकार ने इसी स्कीम को आयुष्मान भारत के रूप में इसका लेटेस्ट वर्जन लॉन्च किया है बस अंतर इतना है कि इसमें उस राशि को बढ़ाकर 500000 तक कर दिया गया है एवं एक परिवार का हेल्थ कार्ड जो बनेगा उसे पूरे परिवार एक साथ लाभान्वित होंगे

?जनता के प्रश्न….✍
                अब यक्ष प्रश्न यह है कि यह योजना अभी एक परिवार के सिर्फ पांच व्यक्ति एवं देश के 50 करोड लोगों को ही लाभान्वित करेगी किंतु भारत की जनसंख्या 130 करोड़ है तो बाकी 80 करोड लोगों का क्या होगा …….? क्या वह भारत के नागरिक नहीं है …..? क्या उन्हें अपने हेल्थ की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार नहीं है…..? अगर है तो उन्हें इस योजना का लाभ कब मिलेगा…..?
                  दूसरी बात यह है कि जिनका नाम सामाजिक आर्थिक जातिगत जनगणना 2011 में छूट गया है अथवा किसी कारणवश नहीं जुड़ पाया है,उनका क्या होगा….? और उन्हें भी जो गरीब हैं जो समुचित इलाज करा पाने में सक्षम नहीं हैं उनका क्या होगा वह कहां जाएंगे….

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अन्य प्रश्न यह है कि जब संपत्ति को आधार कार्ड से लिंक नहीं किया गया है तो फिर आर्थिक डाटा कैसे बनाया गया क्या इसमें पूरी निष्पक्षता का पालन किया गया होगा यदि नहीं तो फिर कैसे मालूम चलेगा ओरिजिनल गरीब कौन है और डुप्लीकेट गरीब कौन है…?

बहुत जगह सुनने में आ रहा है कि प्रत्येक वार्ड में पक्के मकान वालों के नाम जुड़ गए हैं एवं कई गरीबों का नाम छूट गया है फिर उन लोगों का क्या होगा….? उनका नाम कैसे जुड़ेगा…? क्या उनका हल्का हेल्थ कार्ड बन पाएगा…?

आखिर मोदी सरकार कांग्रेस के समय किए गए सामाजिक आर्थिक जातिगत जनगणना 2011 को ही आधार क्यों मान रही है यदि जनता ने वोट मोदी सरकार के लिए दिया है और आयुष्मान भारत योजना मोदी सरकार की ही योजना है तो फिर मोदी सरकार ने अपने इन 4 सालों में सामाजिक आर्थिक जातिगत जनगणना क्यों नहीं कराया क्योंकि जनता ने कांग्रेस को इसलिए खारिज किया था क्योंकि उसका गवर्नेंस ठीक नहीं था और मोदी सरकार ने उसी को आधार मान लिया तो फिर सोचिए क्या योजना वास्तविक लाभुकों तक पहुंच पाएगी…?

            आने वाले समय में कहीं ना कहीं यह सारे मुद्दे उठेंगे और तब जनता मोदी सरकार से प्रश्न करेगी, उसे कटघरे में खड़ा अवश्य करेगी और उस समय देश के प्रधान सेवक को अपनी जनता जनार्दन के इन प्रश्नों का उत्तर अवश्य देना होगा।

सहृदय आभार
नकुल कुमार
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