अटल जी राजनीतिक मर्यादा के आधार है और यही मर्यादा उनके जीवन का संस्कार है

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मोतिहारी। साहित्य अकादमी नई दिल्ली व महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी,बिहार के तत्त्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन केंद्रीय विश्वविद्यालय मे चाणक्य परिसर के राजकुमार शुक्ल सभागार में किया गया।

पत्रकारिता और साहित्य: अटल बिहारी वाजपेयी का विशेष संदर्भ विषयक परिसंवाद का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के पूर्व कुलपति प्रो.अमरनाथ सिन्हा, ड़ॉ. उदय प्रताप सिंह, अध्यक्ष हिंदुस्तान एकेडेमी व प्रो.अरुण कुमार भगत परिसंवाद संयोजक ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलन और माँ शारदे की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया। इसके बाद सभी आगत अतिथियों ने विश्वविद्यालय के कैलेंडर और डायरी का विमोचन किया।

अटल जी के साहित्यिक,पत्रकारीय,राजनीतिक और सामाजिक जीवन के ज्ञात-अज्ञात पहलुओं पर विद्वतजनों ने अपने विचार व्यक्त किये और अटल जी को संवेदनशील,कवि हृदय और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत व्यक्तित्व का संवाहक बताया। उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता ड़ॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि अटल जी साहित्य के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की ज्वाला को प्रज्जवलित करने वाले अद्भूत व्यक्तित्व थे।

अटल जी पत्रकारिता और साहित्य को एक साथ लेकर चलने वाली परम्परा के व्यक्ति रहें। अटल जी की पत्रकारिता त्याग और समर्पण की प्रतिबिंब है। वे राष्ट्र जागरण के गीत गाने वाले कवि पत्रकार थे। परिसंवाद के मुख्य अतिथि प्रो.अमरनाथ सिन्हा ने कहा कि अटल जी व्यक्ति की पीड़ा को जन जन तक पहुँचाकर व्यक्तित्व बन जाने की यात्रा है।

अटल जी ने देश की समस्याओं को गाया तो देश की राजनीति पर भी व्यंग्य किया। उन्होने कहा कि देश के सम्पूर्ण विकास के चितेरे अटल जी जानते थे कि देश का विकास युद्ध,विलास और इमारतों के निर्माण से नही हो सकता, देश का विकास उसकी संस्कृति व ज्ञानपीठिका के विकास से होगा इसलिये वे सदा ज्ञान संस्थानों और ग्राम विकास के प्रति प्रतीबद्ध रहें।

मातृभूमि के प्रति समर्पण अटल जी की बीजवृत्ति बनी । वे भारतीय संस्कृति की त्रिशिखा राम,कृष्ण और शंकर से परिचित थे । उनके साहित्य में भारत की सांस्कृतिक विरासत, संस्कृति और संस्कृति पर आधुनिकता के प्रहारों की पीड़ा स्पष्ट परिलक्षित होती है। राजनीति की तराश और कविता की संवेदनशीलता के एकलौते कवि के रुप में अटल जी जाने जाते है।

सत्र की अध्यक्षता कर रहें केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि अटल जी पत्रकार,साहित्यकार और राजनीतिज्ञ के रुप में स्वयं एक विश्वविद्यालय है।

उन्होने कहा कि यह दौर संक्रमण का है,जिसमें बहुत से व्यक्ति साहित्यकार और पत्रकार है परंतु छद्म भेष में राजनीति में भी है। अटल जी भारतीय राजनीति के एकमात्र ऐसे राजनीतिज्ञ है जिन्होने अपनी विनोदपूर्ण शैली से खाटी के वैचारिक विरोधी को भी अपना बना लिया।

श्री शर्मा ने कहा कि अटल जी संचार माध्यमों के बेहतर उपयोग के भी महारथी थे। अटल जी राजनीतिक मर्यादा के आधार है और यही मर्यादा उनके जीवन का संस्कार है। आज समय की मांग है कि अकादमिक जगत में समाज जीवन के व्यक्तियों के व्यक्तित्वों पर निर्भय,निरपेक्ष और निष्पक्ष विमर्श होना चाहिये। मित्र की दृष्टि से समालोचना आज की मांग है।

परिसंवाद संयोजक, मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो.अरुण कुमार भगत ने कहा कि अटल जी की पत्रकारिता स्वाभिमान तो साहित्य सर्जना संवेदना की परिचायक है। यह परिसंवाद साहित्य और पत्रकारिता का कुंभ है, जिससे समाज में ज्ञानरुपी अमृत का संचार होगा। अटल जी संवेदनशील साहित्यकार,समर्थ संपादक,प्रखर वक्ता,जनपीड़ा के प्रति चिंतित राजनेता और समाज में सामंजस्य के प्रतिबिंब है।

परिसंवाद के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा चेन्नई के कुलपति प्रो.राममोहन पाठक ने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता तपस्या का क्षेत्र है और यह हमारा सौभाग्य है कि अटल जी इन दोनो क्षेत्र के महर्षि रहें।

अटल जी साहित्य, पत्रकारिता और राजनीति के सेतुपुरुष थे। उन्होने कहा कि आज साख और सरोकार से जुडा व्यक्तित्व,निरपेक्ष भाव, विवेचन की निष्पक्षता और राष्ट्रहित पत्रकारिता की आवश्यकता है।

उन्होने अटल जी के समाज जीवन के विविध पक्षों पर अकादमिक कार्यों हेतु एक केंद्रीय राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना हेतु समेकित प्रयास करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उन्होने कहा कि यह संस्थान उनके कार्यों और स्मृतियों को सरंक्षित करने की दिशा में सार्थक प्रयास होगा। इस अवसर पर बी.आर.अम्बेडकर विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के हिंदी विभाग के अध्यक्ष ड़ॉ. रेवती रमण ने अटल जी को सत्याग्रह युग की अन्तिम पीढी बताते हुये कहा कि उनकी साहित्य साधना और पत्रकारिता किसी यश प्राप्ति का साधन नही रही उनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा के मिशन को समर्पित रहा।

इसके लिये उन्होने कभी आलोचना की परवाह नही की। उनकी परवाह तो हिंदुस्तान के आम आदमी की जिंदगी को बेहतर बनाने की रही।

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक ड़ॉ.दर्शन पाण्डेय ने कहा कि उनकी कविता राष्ट्र के पुनर्निर्माण, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की स्थापना की कविता है।

राष्ट्रीय और सांस्कृतिक चेतना के स्वरों से आम जन को आंदोलित करने में उनका कोई सानी नही। वे सेकुलरिज्म के नाम पर भारत की साख को कमजोर करने वालों को भी चेतावनी देते है तो मातृभूमि का गौरवगान भी करते है।

स्वदेश समाचार पत्र के संपादक श्री राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि राजनीति मे रहते हुये कभी भी अटल जी के भीतर का कवि नही मरा । अटल जी की पत्रकारिता वैचारिकी के प्रति तन,मन,धन को समर्पित करने की प्रतिबद्धता है।

यह किसी के चारण बनने की प्रतिबद्धता नही है। अटल जी ने अपने साहित्य और पत्रकारिता के द्वारा अपनी राष्ट्रप्रेम के प्रति समर्पण को दर्शाया है। अटल जी द्वारा लिखे गएँ संपादकीय शाश्वत वाणी है और उन्हें संरक्षित करके उन्हे जन जन तक प्रसारित करना हमारी जिम्मेदारी है।

परिसंवाद के इस सत्र में ड़ॉ.श्यामनन्दन और ड़ॉ.अंजनी श्रीवास्तव ने भी अटल जी के साहित्य और पत्र्कारीय जीवन के विविध पक्षों की विवेचना प्रस्तुत की।

द्वितीय सत्र में मीडिया विशेषज्ञ ड़ॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि अटल जी त्रिवेणी पुरुष है। अटल वास्तव में व्यक्ति नही विचार है। ऋषि परम्परा के साहित्यकार और पत्रकार है अटल जी। अटल जी के जीवन में दो ही चीज महत्वपूर्ण रही एक राष्ट्र और दूसरा राष्ट्रवाद। इस समय देश में दो तरह की मीडिया कार्य कर रही है एक भारत की मीडिया और दूसरी इंडिया की मीडिया।

अटल जी भारत की मीडिया के आदर्श पुरुष है। इंडिया की मीडिया को मानने वाले 2 करोड़ लोग है, जो देश में अशांति फैलाने के एजेण्डे पर चल रहें है। अटल जी भारत की आर्थिक प्रगति की चिंता करने वाले पत्रकार रहें है।

साहित्य अकादमी के हिन्दी परामर्श मंडल के सदस्य ड़ॉ.श्रीराम परिहार ने कहा कि अटल जी न केवल राष्ट्र को लेकर चिंतित रहते थे बल्कि राष्ट्र की भाषा हिंदी के उत्थान के प्रति भी उनकी चिंता रहती थी। अटल जी की पत्रकारिता मे राष्ट्र के उन्नयन की स्पष्ट झलक मिलती है। उन्होने ग्राम विकास, कश्मीर मसले, भारत माता जैसे विषयों पर लेखन किया। राजनीति में स्वाभिमान के साथ शुचितापूर्ण जीवन के वे आदर्श है।

गुरुग्राम से आये ख्यात पत्रकार ड़ॉ.अशोक कुमार ज्योति ने कहा कि अटल जी की पत्रकारिता राष्ट्र के स्वाभिमान की पत्रकारिता है। उन्होने पत्रकारिता के द्वारा देश की तमाम समस्याओं पर निष्पक्ष लेखन किया। उनका लेखन पत्रकारों के लिये आचारसंहिता है।

इस परिसंवाद में मीडिया अध्ययन विभाग के पीएचडी शोधार्थी रजनीश कुमार त्रिपाठी, हिंदी साहित्य की रश्मि सिंह व एमफिल शोधार्थी वारिशा ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये। परिसंवाद के आयोजन में ड़ॉ. अंजनी झा, ड़ॉ. प्रशांत कुमार, ड़ॉ.साकेत रमण, ड़ॉ. परमात्मा मिश्र, ड़ॉ.सुनील दीपक घोडके, ड़ॉ.उमा यादव, पीएचडी शोधार्थी विकास कुमार, कुमार मौसम, अभिजीत, शैलेंद्र पाण्डेय, रोहिताश्व मीणा और एमजेएमसी के विद्यार्थियों अंकित, मृणाल, प्राची, पल्लवी, शिखा,  सुरभि आदि ने अपना सहयोग प्रदान किया।

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